हालांकि, रेल प्रशासन ने इस जांच के बारे में कोई जानकारी नहीं होने की बात कही। इसके बाद विजिलेंस टीम ने भी रिकॉर्ड खंगाले और तब भी रेलवे के अफसर इसे रूटीन चेकिंग बताते रहे। पिछले महीने कई बड़े अफसरों का तबादला हो गया। इसे रूटीन ट्रांसफर का हिस्सा बताया गया।
इसके बाद बृहस्पतिवार को फिर अचानक सीबीआई की एंटी करप्शन टीम पहुंची और एक कर्मचारी को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। रेलवे के अफसर अब भी इन मामलों में कार्रवाई की जानकारी से इंकार कर रहे हैं।
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सब जानते हैं, लेकिन टालते हैं बात
रेलवे में हो रही कार्रवाई से अफसर से लेकर कर्मचारी तक सब वाकिफ हैं। बृहस्पतिवार की शाम को भी जैसे ही सीबीआई की टीम गिरफ्तार कर्मचारी और बिचौलिए को लेकर रेलवे दफ्तर से बाहर निकली, चर्चा शुरू हो गई। अफसर और कर्मचारी इस मामले की तह तक जाने के लिए एक दूसरे को फोन करने लगे। कुछ ही देर में चर्चा होने लगी कि एक ठेकेदार की शिकायत पर कार्रवाई हुई है।
सीबीआई की एंटी करप्शन टीम यहां से अपना काम कर लौट चुकी है। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। अफसर और कर्मचारी इस बात को लेकर आशंकित हैं कि अभी और कितने लोग लपेटे में आएंगे। क्योंकि पुराने मामलों की पड़ताल से सीबीआई को काफी कुछ जानकारी मिल चुकी है।