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UP News: मौके पर काम हुआ ही नहीं, कर दिया गया 80 लाख रुपये का भुगतान, पूर्व बीडीओ व दो जेई समेत चार पर दर्ज होगा मुकदमा

Wed, 25 May 2022 12:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि प्रथम दृष्टया शासकीय गबन में पूर्व बीडीओ, आरईएस और लघु सिंचाई के एक-एक जेई और लेखाकार की संलिप्तता मिली है। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी। जिसकी भी संलिप्त मिलेगी, उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर में बिना काम कराए ही 80 लाख रुपये का भुगतान कर देने के मामले में सहजनवां के पूर्व ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) दुर्योधन, आरईएस के जेई सुबोध कुमार तिवारी, लघु सिंचाई के जेई अजय कुमार और लेखाकार राघवेंद्र पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी  की जांच में घोटाला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट डीएम विजय किरन आनंद के पास भी भेजी गई है।  डीएम ने चारों आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही मामले की विस्तृत जांच कराने व धनराशि के रिकवरी के निर्देश दिए हैं।

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मुख्य विकास अधिकारी इंद्रजीत सिंह ने एक अप्रैल 2022 को सहजनवां ब्लॉक के सभाकक्ष में सहजनवां के साथ ही पिपरौली और पाली ब्लॉक में कराए गए विकास कार्यों की समीक्षा की थी। इसी दौरान वार्ड संख्या 40 के क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि मनोज कुमार दूबे और वार्ड नंबर तीन के क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि धनंजय सिंह ने शिकायत की थी।

आरोप था कि सहजनवां के बीडीओ, जेई व जनप्रतिनिधियों ने बिना कार्य कराए करोड़ों का भुगतान फर्जी ढंग से कर दिया है। इसका संज्ञान लिया गया और मुख्य विकास अधिकारी ने 12 अप्रैल 2022 को जिला समाज कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) की अगुवाई में जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की थी। जांच कमेटी ने 11 और 12 मई को संबंधित 15 विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर 13 मई को रिपोर्ट सौंपी है। जांच में घोटाले के आरोपों की पुष्टि हुई है।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, स्थलीय सत्यापन से पता चला कि 15 में से 10 कार्य तो कराए ही नहीं गए। बाकी बचे पांच कार्य के बारे में भी रोजगार सेवक और प्रधान ने बताया कि सत्यापन के दो दिन पहले ही उन्हें कराया गया था। वे भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। अभिलेखों की जांच में पता लगा कि सभी कार्यों का भुगतान नवंबर 2021 में ही कर दिया गया था।

विस्तृत जांच में खंगाले जाएंगे सभी बिंदु, कई और फंसेंगे
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम विजय किरन आनंद ने मामले को गंभीर बताया है। डीएम ने कहा है कि कार्य योजना तैयार कर कार्यपूर्ति दिखाने के बाद शासकीय धन के गबन में किस-किस की भूमिका है, प्रत्येक की जांच की जाए। साथ ही सभी भुगतान जिन चेकों के माध्यम से लिया गया है, उस पर किस-किस के हस्ताक्षर हैं, इसकी भी विस्तार से जांच की जाए। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक विस्तृत जांच में अभी कई और की गर्दन फंसने की संभावना है।

डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि प्रथम दृष्टया शासकीय गबन में पूर्व बीडीओ, आरईएस और लघु सिंचाई के एक-एक जेई और लेखाकार की संलिप्तता मिली है। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी। जिसकी भी संलिप्त मिलेगी, उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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