10 करोड़ की संपत्ति पर फर्जी वसीयत बनाकर 35 एकड़ जमीन को अपने नाम करवाने के मामले में यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह समेत नौ आरोपियों को सिविल जज सीनियर डिवीजन ने दोषी करार दिया। मंत्री को 5 साल की सजा सुनाई है जबकि अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया जाएगा।
वर्ष 2014 में यूपी के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश सिंह, उनकी पत्नी गीता, पुत्र शिववर्धन व पुत्रवधू निधि सिंह समेत पूर्व शासकीय अधिवक्ता स्वतंत्र बहादुर सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह, पुत्रवधू शिखा सिंह व वसीयत गवाह नवनाथ तिवारी, प्रेम नारायण सिंह को न्यायालय ने दोषी पाया।
प्रेम प्रकाश सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की बरहज विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं और मंत्री भी रहे हैं। उनकी पत्नी उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र की ब्लाक प्रमुख रही हैं।
आजाद हिंद फौज के सिपाही थे रामअवध सिंह
आजाद हिंद फौज के सिपाही रामअवध सिंह मूल रूप से आजमगढ़ के पूनापार के रहने वाले थे। आजादी के बाद पुलिस में भर्ती हुए। डिप्टी एसपी के पद से रिटायर हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को देखते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कृषि कार्य के लिए ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर के बागवाला गांव में 32 एकड़ जमीन आवंटित की।
10 जून 1999 को रामअवध की मृत्यु के बाद जमीन उनकी इकलौती पुत्री प्रभावती देवी के नाम दर्ज हो गई। उनकी शादी आजमगढ़ की तहसील बूढनपुर क्षेत्र के सिंघोड़ा गांव में होने से वह यहां नहीं रहती हैं। ऐसे में फर्जी वसीयत तैयार कर पूर्व मंत्री ने जमीन अपने नाम करा ली।
घटना की जानकारी होने पर प्रभावती ने इसकी शिकायत डीआईजी से की। इस पर तीन मई 2014 को धारा 420, 467, 468, 471, 506, 504 के तहत प्रेम प्रकाश के साथ ही वसीयत के गवाह ग्राम तिलियापुर, सितारगंज निवासी नवनाथ तिवारी और प्रेमनारायण को नामजद किया गया था।