बसपा से इस्तीफा देने वाले पर पूर्व मंत्री देवनारायण सिंह।
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मिशन 2022 से पहले पूर्वांचल में बसपा की रीढ़ माने जाने वाली सैंथवार-कुर्मी बिरादारी के नेताओं में भगदड़ सा माहौल है। एक के बाद एक बड़े नेता पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं। इससे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बसपा को तगड़ा झटका लगा है। बसपा विधानमंडल के नेता लालजी वर्मा के निष्कासन के बाद अब दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रहे देव नरायन ऊर्फ जीएम सिंह ने पार्टी छोड़ दी है।
जीएम सिंह सैंथवार-कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता माने जाते हैं। वह 1995 से ही बसपा से जुड़े थे। गोरखपुर की सहजनवां व महराजगंज की पनियरा विधानसभा सीट से दो बार विधायक भी रह चुके हैं।
दरअसल, बसपा से इस बिरादरी के नेताओं का मोहभंग होना तात्कालिक नहीं है बल्कि इस पटकथा दो वर्षों से बनी है। पार्टी को सबसे पहला झटका बसपा के पूर्व कोआर्डिनेटर रह चुके इंद्रजीत सरोज ने दिया। बसपा में जब उनका कद कम किया गया तो उनकी नजदीकियां सपा से बढ़ गईं।
आखिरकार पार्टी छोड़कर वे सपा में चले गए। इनदिनों सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबियों में हैं। इंद्रजीत सरोज के जाने के बाद से बसपा में बिरादरी से जुड़े नेताओं में फूट पड़ने लगी। इसके बाद पूर्व मंत्री बस्ती के रामप्रसाद चौधरी ने भी बसपा छोड़कर सपा ज्वाइन कर लिया।
राम प्रसाद अपनी बिरादरी में अच्छी पैठ रखते हैं। कुछ ही दिनों बाद बस्ती से पूर्व सांसद अरविंद चौधरी ने भी बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। इसके बाद लालजी वर्मा की नजदीकियां सपा से बढ़ीं। पंचायत चुनाव में सपा की नजदीकियां खुलकर सामने आ गईं।