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यूपी: कोरोना काल में इस शख्स ने 150 लोगों को दिया रोजगार, इसकी बदौलत कई घरों में जल रहे चूल्हे

Fri, 04 Jun 2021 06:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।

सार

2014 में गांव में खोली थी बच्चों की फ्राक बनाने की फैक्टरी, कई राज्यों में है सप्लाई
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रोशल अली। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विकास खंड बहादुरपुर के मटेरा निवासी रोशन अली ने कोरोना काल में गांव लौटे करीब डेढ़ सौ लोगों को फ्राक बनाने की फैक्टरी में रोजगार दिया है।

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कुछ साल पहले तक रोशन अली हैदराबाद में बच्चों की फ्राक बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। वहां उन्हें अच्छी आमदनी होती थी। फिर उन्हें ख्याल आया कि परदेस के बजाय क्यों न गांव चलकर कारोबार जमाया जाए। अब तो गांव में भी शहरों जैसा विकास हो रहा है।

इसके बाद 2014 में गांव आकर सिलाई का कारखाना लगाया। धीरे-धीरे गांव के साथ-साथ आसपास के नगर बाजार, माड़न, गोविंदापुर, जलालपुर, बहादुरपुर समेत कई गांवों की महिलाओं व पुरुषों को उससे जोड़ना शुरू किया। उन्हें सिलाई का प्रशिक्षण दिया। धीरे-धीरे लगभग करीब पचास लोग जुड़ गए।
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रोशन बताते हैं कि इसका फायदा यह हुआ कि पिछले साल जब पहली बार लॉकडाउन लगा तो दूसरे प्रांतों से लौटकर आए करीब सौ लोग और जुड़ गए। अक्तूबर में लॉकडाउन खुला तो उसमें से कई वापस चले गए, लेकिन एक महीने पहले जब दूसरी बार कोरोना के मामले बढ़े तो दूसरे प्रांतों से लौटे पचास और लोगों ने संपर्क किया।

मौजूदा समय में करीब सवा दो सौ लोग उनके कारोबार से जुड़े हैं। शहबान अली, रुस्तम अली, प्रमोद यादव, आदित्य सिंह, मो. अजीज, सुहेल अहमद, रुखसाना खातून, हसीना खातून ने बताया कि रोशन अली के माध्यम से उन्हें घर में ही काम मिल गया। महीने में इतनी कमाई आसानी से हो जाती है कि परिवार का खर्च निकल आता है। कुछ बचत भी हो रही है। बाहर जाने और आने का खर्च बच रहा है। सबसे बड़ी बात यह कि हम अपने परिवार के बीच हैं।

 

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पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों तक है सप्लाई

रोशल अली बताते हैं कि वह यहां तैयार फ्राक असम, उड़ीसा, हैदराबाद, कर्नाटक आदि बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं। उससे अच्छा खासा मुनाफा मिल रहा है। इसी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का पलायन भी अब शहरों के तरफ कम हुआ है। लोग गांव में ही कुछ करने की सोचने लगे हैं।

मैंने देखा है गांव के लोगों का दर्द
रोशन अली कहते हैं कि दूसरों पर आश्रित न होकर खुद आत्मनिर्भर बनने के लिए दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं। शहर जाकर बसे गांव के लोगों का दर्द मैंने बचपन से देखा है। मैं चाहता हूं कि गांव में रहने वाला हर व्यक्ति गांव में ही रोजगार हासिल करे। उसे रोजी-रोटी के लिए शहरों पर आश्रित न होना पड़े। इसके लिए स्वरोजगार का रास्ता अपनाया जा सकता है।
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