संतोष पांडेय ने इस घटना के बाद से सोशल मीडिया के फेसबुक पर लिखा कि तिलक पैथालॉजी से सावधानी रहें। आरटीपीसीआर की जगह पैथालॉजी ट्रूनेट मशीन से जांच कर रहा है। जबकि लोगों को आरटीपीसीआर से जांच की विधि बताई जा रही है। लिखा है कि अगर प्रशासन का सहयोग न मिलता तो बड़ी घटना घट जाती। ऐसी स्थिति में तिलक पैथालॉजी को सील करते हुए कार्रवाई होनी चाहिए।
खड़े हुए निजी पैथालॉजी की जांच पर सवाल
निजी पैथालॉजी की जांच पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आरटीपीसीआर की जांच 99 प्रतिशत तक सही मानी गई है। लेकिन ट्रूनेट मशीन पर विशेषज्ञ सवाल खड़े करते रहे हैं। क्योंकि इनके गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई नहीं है। न ही यह अब तक बहुत प्रमाणित माना गया है।
तिलक पैथालॉजी के निदेशक डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रूनेट मशीन से जांच की गई है। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी दी गई है। इसमें कोई चूक नहीं हुई है।