गोरखपुर जिले में बाढ़ की दृष्टि से 400 गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने इनपर विशेष नजर रखने को कहा है। ये गांव पिछले साल की बाढ़ में भी प्रभावित हुए थे। इनमें से अधिकतर गांव गोला, कैंपियरगंज एवं सहजनवां तहसील के हैं। कुछ गांव सदर तहसील क्षेत्र में भी हैं।
नदी के खतरे के निशान से ऊपर जाते ही इनमें से अधिकतर गांव पानी से घिर जाते हैं। इन गांवों में इंसान से लेकर पशुओं तक की चिंता की जा रही है। बाढ़ चौकियों को तो सक्रिय किया ही गया है, बाढ़ राहत शिविरों के लिए ऊंचाई पर स्थित स्थान भी चिन्हित किए जा रहे हैं।
डिग्री कॉलेज एवं इंटर कॉलेज में राहत शिविर बनाने की तैयारी है। खाद्यान्न के साथ ही पशुओं के चारा की व्यवस्था भी की जा रही है। उसके लिए भी टेंडर जारी किए जा चुके हैं। पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीका लगाने का इंतजाम पूरा रखने को गया है।
साथ ही सभी सीएचसी व पीएचसी पर स्नैक एंटी वेनम रखने को कहा गया है। इस बार बड़ी नाव लगाने की भी तैयारी है। इसके लिए सभी नाविकों से संपर्क करने को कहा गया है। जहां भी रास्ते बंद होंगे, वहां नाव लगा दी जाएगी।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि नदियों में पानी भले ही बढ़ रहा है मगर बाढ़ के मद्देनजर अभी जिले में स्थिति नियंत्रित है। 400 गांव बाढ़ की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील हैं। एहतियातन इन गांवों को बचाने व वहां राहत पहुंचाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। इन 400 गांवों में खाद्यान्न, नाव, पशुओं के चारा आदि की व्यवस्था करने को कहा गया है। तटबंधों की निगरानी भी की जा रही है।