बस्ती जिले के गौर थाना क्षेत्र के तरैनी गांव में शुक्रवार की रात पुलिस और ग्रामीणों में हुई झड़प के मामले में एसपी आशीष श्रीवास्तव ने शनिवार को एक दरोगा समेत पांच पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, मामले में गौर थाने में एक पक्ष की तहरीर पर सात लोगों के खिलाफ मारपीट व बलवा का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, तरैनी गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प के लिए पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने प्रथमदृष्टया स्थानीय पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार माना है। इस मामले में शुक्रवार की देर रात मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र नाथ चौधरी और सीओ हर्रैया शेषमणि उपाध्याय की रिपोर्ट के आधार पर एसआई सिद्धनाथ यादव, हेड कांस्टेबल रमाशंकर यादव, अजीत कुमार व कांस्टेबल अरविंद कुमार, दीपक चौहान को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
बताया कि पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है। जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले में गौर तरैनी गांव के वीरेंद्र कुमार यादव की तहरीर पर दूसरे पक्ष के राजदेव यादव, विद्यावती, हृदयराम यादव, राजेश यादव, अंजलि, विमला उर्फ लालमति व जोगिंदर के खिलाफ मारपीट करने व बलवा का मुकदमा दर्ज किया गया है।
आत्मा भटकने का उलाहना देने पर हुआ था विवाद
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि तरैनी गांव के वीरेंद्र कुमार यादव के बड़े भाई की वर्ष 2015 में बीमारी से मृत्यु हो गई थी। वीरेंद्र का आरोप है गांव के कुछ परिवारों का मानना है कि उसके भाई की आत्मा अब भी गांव में भटक रही है। ऐसे में जब भी कोई बीमार पड़ता है तो लोग उसके घर उलाहना देने पहुंच जाते हैं कि भाई की आत्मा को शांत कराओ। शुक्रवार को भी यही हुआ। गांव की एक लड़की और भैंस बीमार पड़ गई। इसकी उलाहना देने जब योगेंद्र के पक्ष के लोग वीरेंद्र के घर पहुंचे तो विवाद शुरू हो गया।
पुलिस टीम पर कर दिया था पथराव
वीरेंद्र और उसके विपक्षी के बीच हो रहे विवाद की सूचना पर जब शुक्रवार की देर रात पुलिस गांव पहुंची तो पुलिस टीम पर भी पथराव कर दिया गया। इसमें कुछ पुलिसकर्मी व ग्रामीणों को भी चोटें आई और सरकारी जीप के शीशे भी टूट गए थे।