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धान की फसल बेचने के लिए क्रय केंद्रों पर जाने से कतरा रहे हैं किसान, खरीद का नंबर कब आएगा पता नहीं

Wed, 28 Oct 2020 11:41 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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धान की नमी, तोल की दिक्कत सहित तमाम बहानेबाजियों से भी परेशान हैं किसान। - फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में धान की फसल खरीदने के लिए खाद्य विभाग की ओर से 442 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसान इन केंद्रों पर धान की फसल बेचने से बच रहे हैं।

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अधिकतर किसान आढ़तियों के माध्यम से फसल बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर बिक्री का नंबर बहुत देरी से आता है। किसानों के पास इतना समय नहीं होता कि वह तोल के लिए लंबे समय तक इंतजार कर सकें। लिहाजा, क्रय केंद्रों से किनारा करना मजबूरी है।  

सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की बिक्री की अमर उजाला संवाददाता ने पड़ताल की। जो किसान मिले, उनके मुताबिक क्रय केंद्रों पर धान की फसल खरीदने से पहले कभी अधिक नमी का हवाला दिया जाता तो कभी दाना सही नहीं होने की बात कही जाती है। सरकार के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं होने की बात कह कर या तो दाम कम दिए जाते हैं या नमी को सुखाने की बात कही जाती है।
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नमी को सुखाने में कई दिन लगते हैं। इतना समय किसानों के पास नहीं होता है कि वह मंडी में कई दिनों तक फसल की रखवाली करता रहे। ऐसे में किसान आढ़तियों का सहारा लेते हैं। किसानों की इसी मजबूरी का फायदा बिचौलिए उठाते हैं। बिचौलिए किसानों की फसल को क्रय केंद्रों की तुलना में निर्धारित मूल्य से पांच-छह सौ रुपये कम दाम पर खरीदते हैं।

धान दिखाकर दाम और तिथि तय करा लें किसान

किसानों ने क्रय केंद्रों पर नंबर मिलने, तोल कराने और अन्य कार्यों के लिए पांच-छह सौ रुपये कमीशनबाजी के आरोप भी लगाए। उनका आरोप था कि ऐसा नहीं करने पर न तो जल्द नंबर मिल पाता है और न जल्दी तोल होती है। इस तरह खरीद का इंतजार बढ़ जाता है। छोटे किसानों के पास फसल तैयार होने के बाद स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होती है। इस कारण फसल को जल्द बेचने की विवशता होती है, ताकि मौसम या किसी अन्य प्रकार की आपदा का सामना न करना पड़े।
 
क्रय केंद्रों पर जाने से पहले किसानों को पंजीकरण करा लेना चाहिए। पहले एक मुठ्ठी धान क्रय केंद्र पर ले जाकर उसकी जांच करा लें। उसकी कीमत और समय तय करा लें। निर्धारित तारीख को पूरी फसल बेचने के लिए क्रय केंद्र पर लाएं। ऐसा नहीं करने पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्रय केंद्रों पर कर्मचारियों की कमी है और दूसरे संसाधन भी सीमित हैं। एक साथ काफी संख्या में किसानों के पहुंचने से फसल खरीदने में देरी होती है।

धान की फसल पर लागत बारिश पर निर्भर
किसानों के मुताबिक धान की फसल और उस पर आने वाला खर्च प्रति वर्ष होने वाली बारिश पर निर्भर करता है। यदि बारिश अच्छी होती है तो फसल पर खर्च कम आता है। यदि बारिश कम होती है तो सिंचाई के लिए जनरेटर अथवा मोटर चलानी पड़ती है। इससे डीजल और बिजली बिल का खर्च बढ़ जाता है और धान की लागत बढ़ जाती है।

क्या बोले किसान

रमवापुर के किसान अजय प्रताप मिश्रा ने बताया कि 25 बीघा में खेती करता हूं। क्रय केंद्रों पर जल्द नंबर नहीं आने और तोल में देरी होने के कारण आढ़तियों को फसल बेचने की मजबूरी है। लंबे समय तक फसल को सुरक्षित रखने की किसानों के पास व्यवस्था नहीं है। एक गांव से महज पांच-दस प्रतिशत किसान ही क्रय केंद्रों पर फसल बेच पाते हैं।
 
मुडियारी बुजुर्ग के किसान श्यामु प्रजापति ने बताया कि तीन बीघा में खेती करता हूं। क्रय केंद्र पर पंजीकरण कराया है, लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी फसल बेचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। फसल को कई दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए कोई संसाधन नहीं है। मजबूरन बिचौलियों को पांच-छह सौ रुपये कम दाम में फसल बेचनी पड़ सकती है।
 
रक्षवापार गांव के युवा किसान मनीष कुमार सिंह ने बताया कि सभी किसानों की समस्या एक जैसी है। क्रय केंद्र पर फसल खरीद की प्रक्रिया सुस्त है। लिहाजा, बिचौलियों के पास जाना पड़ता है। फसल की पैदावार पर खर्च भी अधिक आता है, बावजूद इसके बिचौलियों को फसल बेचने की मजबूरी है। सरकार जब तक व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करेगी, तब तक यह क्रम जारी रहेगा।
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किसान रणजीत सिंह ने बताया कि दस बीघा जमीन पर बीस वर्षों से खेती कर रहा हूं। बिचौलियों, आढ़तियों को कम मूल्य पर फसल बेचने से किसान दुखी हैं, लेकिन क्रय केंद्र पर नंबर, तोल और फसल खरीद की प्रक्रिया जटिल और लंबी है। किसान के पास बिचौलियों के पास फसल बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता है।  
 
पंजीकरण कराकर ही क्रय केंद्रों पर फसल बेचने जाएं
सामान्य धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए के धान का 1888 रुपये प्रति क्विंटल तय है। धान बेचने के लिए क्रय केंद्र ले जाते समय किसानों को पंजीयन प्रपत्र के साथ जोत बही, खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति और आधार कार्ड साथ रखना चाहिए। क्रय केंद्रों पर धान की उतराई, छनाई और सफाई में आने वाला 20 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च किसानों को ही वहन करना होगा। बिचौलियों से बचने के लिए किसानों को विभाग के पोर्टल http/www.fcs.up.nic.in पर पंजीकरण करवा लेना चाहिए।

सीईओ गीडा व गोरखपुर के कार्यवाहक आरएफसी संजीव रंजन ने बताया कि कुछ समस्याएं हैं। 17 फीसदी नमी तक फसल ली जाती है। बारिश की वजह से फसल में नमी ज्यादा है। किसानों को वापस न किया जाए, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है। फसल का पूरा दाम मिले, यह भी सुनिश्चित होगा। बेवजह किसी किसान को लौटाया नहीं जाएगा। क्रय केंद्र प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। कांटे का सत्यापन भी कराया जा रहा है।
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