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गोरखपुर: जानकारी के अभाव में किसान नहीं करा रहे फसल बीमा, 5.91 लाख किसानों में से सिर्फ एक कर पाया ऑनलाइन आवेदन

Mon, 27 Dec 2021 01:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

विभिन्न केंद्रों की मदद से कुल 34 हजार किसान योजना में पंजीकृत, योजना, आवेदन की प्रक्रिया, बीमा की धनराशि आदि की जानकारी न होने से परेशानी।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - फोटो : istock
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विस्तार
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किसानों के लिए संकट मोचक करार दी गई फसल बीमा योजना जिले में जागरुकता के अभाव में उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। सहूलियत के लिए जारी इस योजना में व्यवस्थाएं तो तमाम हैं लेकिन किसानों को इसकी जानकारी ही नहीं है। हालत यह है कि रबी सीजन के लिए बीमा पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित है और जिले के 5.91 लाख किसानों में से अभी तक केवल 34 हजार किसानों ने ही विभिन्न केंद्रों की मदद से पंजीकरण कराया है। वहीं केवल एक किसान ऐसा है जिसने खुद अपना पंजीकरण किया है। किसानों की तो छोड़िए, तमाम जन सेवा केंद्र संचालकों को भी नहीं पता कि फसल बीमा के लिए पंजीकरण होता कैसे है?

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जिले में हर साल बरसात में राप्ती, सरयू, रोहिन, गोर्रा और आमी नदी में बाढ़ के चलते 300 से अधिक गांवों के किसानों की फसल बर्बाद होती है। खेती चौपट होने पर तमाम परिवारों के सामने भोजन का भी संकट गहरा जाता है। ऐसे किसानों की दिक्कत को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी।

इस योजना के तहत भूमि मालिक किसानों के साथ-साथ बटाईदार व सह खातेदार को भी लाभ देने की व्यवस्था है। किसानों को न्यूनतम प्रीमियम का भुगतान करना होता है। परंतु यह सारी कवायद अब तक बहुत फायदेमंद नहीं रही है। वजह यह है कि किसानों का पंजीकरण ही बहुत कम है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में कुल 5.91 लाख किसान हैं। इनमें से 5.19 लाख को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है।
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करीब सवा लाख किसान केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) धारक हैं। परंतु केवल 34 हजार किसानों ने ही अपनी फसल का बीमा कराया है। इसमें से भी केवल एक आलू उत्पादक किसान ऐसा है, जिसने अपना बीमा खुद किया है। बाकी किसानों को किसी जनसेवा केंद्र या फिर कृषि विभाग की ही मदद लेनी पड़ी है। किसान इसकी सबसे बड़ी वजह जानकारी का अभाव बता रहे हैं।

 

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ऑनलाइन नहीं भर पा रहे फार्म

भटहट क्षेत्र के किसान सर्वेश कुमार सिंह, विनय कुमार उपाध्याय, जयनाथ विश्वकर्मा आदि का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया कहने में तो बहुत आसान है, लेकिन इस पर पंजीकरण करने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम होना जरूरी है। पहले पंजीकरण कराइये और फिर आधार नंबर, मोबाइल नंबर, खतौनी आदि का विवरण जुटाइए। अगर बटाईदार या सह खातेदार हैं तो 10 रुपये के स्टॉम्प पेपर पर समझौता पत्र लगाइये। इतनी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद बैंक खाते से बीमा की रकम कटेगी। इतना तामझाम कराने के लिए सेवा केंद्र पर 50 रुपये देना होगा वह अलग। इसलिए हमने पंजीकरण ही नहीं कराया।

कराया जा रहा है बृहद प्रचार

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रबंधक धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि एलईडी टीवी युक्त एक प्रचार वाहन चलाया जा रहा है। इस पर फसल बीमा योजना से संबंधित फिल्म किसानों को दिखाई जा रही है। केसीसी खाताधारकों को केवल एक प्रार्थना पत्र देना होता है। गैर ऋणी किसानों को पंजीकरण कराना होता है। उत्तर प्रदेश में पंजीकरण के लिए किसान को फसल बोने का प्रमाण पत्र भी नहीं देना होगा।

किसानों ने क्या कहा

फसल बीमा योजना के पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। प्रशासन या कृषि विभाग की तरफ से कोई जागरूकता कार्यक्रम भी हमारे गांव में अब तक नहीं हुआ है। इस योजना के बारे में चर्चा तो बहुत सुन चुका हूं। अब कृषि विभाग से पता करके बीमा कराऊंगा।
-जगमोहन शुक्ला, किसान, बसडीला, चौरीचौरा

फसल का बीमा कराने के लिए कई बार ब्लॉक के चक्कर लगाए, तब मालूम हुआ कि पंजीकरण जन सेवा केंद्र पर होगा। जन सेवा केंद्र पर गया तो वहां एक दिन सर्वर खराब होने के कारण नहीं हुआ। एक दिन गया तो केंद्र ही बंद था। थक हार कर दोबारा प्रयास ही नहीं किया।
-ध्रुवनारायण मिश्रा, किसान, रामपुर बुजुर्ग, भटहट

हम ऑनलाइन पंजीकरण कैसे कर पाएंगे, जब सेवा केंद्र वालों को ही नहीं पता। मैंने कई जगह पता किया। पंजीकरण के लिए खतौनी, आधारकार्ड नंबर, मोबाइल नंबर और पता नहीं क्या-क्या कागज मांगा जा रहा है। इसलिए हमने अपना पंजीकरण नहीं कराया है।
- अजय निषाद, किसान, चकरामपुर, भटहट

किसानों के लिए चलाई गई अधिकांश योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। जबकि अब भी तमाम किसान कम पढ़े-लिखे हैं। सरकार को हर गांव में कैंप लगाकर पंजीकण की व्यवस्था करानी चाहिए, जिससे कि सभी किसान अपना पंजीकरण करा सकें। इसके अलावा प्रीमियम के बारे में भी जानकारी मिल सके।
- राकेश सिंह, किसान, अमवा, भटहट
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