जीडीए को 24 में से एक गांव दौलतपुर के नौ किसानों ने जमीन देने पर सहमति दी है। कुछ अन्य के भी तैयार होने की उम्मीद है। शहर से सटे यह गांव अर्द्धनगरीय है। गांव की तुलना में यहां का सर्किल रेट अधिक है इसलिए यहां के नौ किसान तैयार हो गए हैं। हालांकि अभी गांव के दूसरे किसानों ने सहमति नहीं दी है।
यह है अनिवार्य भू अधिग्रहण की प्रक्रिया
भू अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय के विरष्ठ सहायक आशीष पांडेय के मुताबिक अनिवार्य भू-अधिग्रहण की विस्तृत प्रक्रिया होती है। पहले जमीन चाहने वाले यानी जीडीए की तरफ से भू-अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव दिया जाएगा। कार्यालय, सर्वे के लिए एजेंसी का चयन करेगा। एजेंसी भूमि अधिग्रहण के लिए निदेश निबंधन प्रस्तुत करेगी।100 एकड़ तक भूमि अधिग्रहण के मामले में डीएम और उससे अधिक के मामले में शासन स्तर से प्रस्ताव पर अनुमति लेनी पड़ती है। जीडीए को 100 एकड़ से अधिक जमीन चाहिए इसलिए निर्देश निबंधन शासन को भेजा जाएगा।
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वहां से इसे अनुमति मिलने के बाद भू-अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय द्वारा इस बात का विज्ञापन निकाला जाएगा कि संबंधित योजना के लिए संबंधित एजेंसी का चयन किया गया है। यह एजेंसी गांव-गांव जाकर विस्तृत ड्राफ्ट तैयार करेगी और अनंतिम रिपोर्ट देगी। इसके बाद लोक सुनवाई होगी । जिस अधिकारी की अध्यक्षता में यह सुनवाई होगी, उसके नाम की स्वीकृति शासन स्तर से मिलेगी।
संबंधित अधिकारी के नाम का अनुमोदन होने के बाद इसका भी विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। लोक सुनवाई की पूरी बैठक की वीडियो रिकार्डिंग होगी। इसके बाद एजेंसी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी जिसके बाद भू अर्जन नियमावली 2016 के सेक्शन सात के तहत एजेंसी की रिपोर्ट के अध्ययन के लिए बहुसाखीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाएगा। इसमें विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के दो प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग के दो प्रोफेसर के अलावा संबंधित ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों के दो सदस्य शामिल होंगे। साथ ही शासन स्तर से एक तकनीकी विशेषज्ञ भी नामित किया जाएगा।
विशेषज्ञ एक बैठक आयोजित करेंगे। बैठक में एजेंसी भी अपने अध्ययन रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण करेगी। बैठक के बाद समूह अपना परीक्षण रिपोर्ट तैयार कर सीधे शासन को भेजेगा। रिपोर्ट पर शासन की सहमति मिलने के बाद फिर जीडीए से धारा 11 का प्रस्ताव मांगा जाएगा जिसमें ग्राम, गाटा संख्या और रकबा समेत अधिग्रहण से संबंधित सभी जानकारी होगी। इसका प्रकाशन करने के बाद धारा 19 का प्रकाशन होगा जिसके बाद रेट का निर्धारण कर भूमि पर कब्जा प्राप्त किया जाएगा।
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डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि यह शासन की बहुत महत्वपूर्ण योजना है। जिले की बढ़ती आबादी और लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नया गोरखपुर का विकास जरूरी है। किसानों से संवाद कर सहमति लेने की कोशिश की गई है। वे तैयार नहीं है तो अनिवार्य अधिग्रहण की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। सभी को उचित मुआवजा दिया जा रहा है। उन्हें सहयोग करना चाहिए।
हमारी जमीन कोई नहीं छीन सकता। सरकार सही रेट दे तो विचार करेंगे। सात साल पहले के सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है। यह अन्याय है।
- अनिल कुमार पासवान, बहरामपुर।
जमीन नहीं देंगे। छोटी जोत के किसान है। थोड़ी सी ही तो जमीन है। उसे बेच देंगे या सरकार को दे देंगे तो अपने परिवार का गुजर बसर कैसे करेंगे। यदि जबरन जमीन ली गई तो हम धरने पर बैठेंगे।
- रामाज्ञा पासवान, बहरामपुर।
छोटी सी जमीन का टुकड़ा है। सब्जी की खेती कर परिवार चलाते हैं। अभी कच्चे मकान में रहते हैं। पक्का मकान बनाने की कई साल से योजना है। पैसे के अभाव में निर्माण नहीं हो पा रहा है। किसी भी दशा में जमीन नहीं देंगे।
- आफताब अहमद, कुसम्ही।
जीडीए बहुत कम मुआवजा दे रही है। बड़ी बात यह कि हम जमीन देंगे ही नही। थोड़ी सी तो जमीन है। उसे दे देंगे तो बच्चों को क्या खिलाएंगे और कैसे उनके भविष्य की सुरक्षा करेंगे। जमीन छिनी गई तो जान दे देंगे।
- रामप्रीत, कुसम्ही।