गोरखपुर में खुदरा और थोक व्यापारियों को लोन को छोड़कर, अन्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इस संबंध में केंद्र सरकार ने निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है। लघु उद्योग भारती ने सरकार के इस कदम की सराहना की है।
केंद्र सरकार ने दो जुलाई 2021 को ज्ञापन जारी कर खुदरा और थोक व्यापार को एमएसएमई के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया था और उन्हें उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत होने की अनुमति दी थी। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि दर्जा प्रदान का उपयोग ‘प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और उधार’ तक सीमित है। लघु उद्योगों को दी जाने वाली वरीयता ऋण सुविधा का लाभ अब व्यापारियों को भी उपलब्ध होगा।
इस निर्णय का प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर लघु उद्योग भारती ने विरोध किया था। जिसके परिणाम स्वरूप केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय ने दिनांक 18 अगस्त 21 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी करके यह स्पष्ट किया है कि जहां तक खुदरा और थोक व्यापारी का संबंध है, ये ट्रेड आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के लाभ के ही पात्र होंगे।
खुदरा और थोक व्यापार इस मंत्रालय की योजनाओं/कार्यक्रमों का लाभ लेने के हकदार नहीं होंगे। जैसे कि खरीद वरीयता नीति, एमएसईएफसीएस में आपूर्तिकर्ता के रूप में मामले दर्ज करना या एमएसएमईएस को उपलब्ध कोई अन्य लाभ।
लघु उद्योग भारती गोरखपुर के जिलाध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि हम खुदरा और थोक व्यापारियों के विरोध में नही हैं, परंतु उद्योगों को मिलने वाली सुविधाएं या लाभ उद्योगों तक ही सीमित रहना चाहिए। उनके हक का बंटवारा नही किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के इस निर्णय का हार्दिक स्वागत है।