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गोरखपुर: देसी उद्यमियों को भा गई प्रदेश सरकार की नीति, बोले- गीडा से करेंगे कारोबार, युवाओं को देंगे रोजगार

Mon, 12 Jul 2021 12:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

गीडा में उद्योग लगाने को बेकरार हैं दूसरे राज्यों में स्थापित गोरखपुर के उद्यमी।
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अपराजिता, शमशाद और चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दूसरे राज्यों में उद्योग चलाने वाले गोरखपुर के उद्यमी गोरखपुर में अपना उद्योग स्थापित करना चाहते हैं। उद्यमियों को जहां प्रदेश सरकार की नई उद्योग नीति आकर्षित कर रही है वहीं अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव भी इसकी बड़ी वजह है।
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दूसरे राज्यों में उद्योग चलाने वाले उद्यमियों की भी इच्छा है कि वह पूर्वांचल में अपनी फैक्टरी लगाकर काम की शुरुआत करें। दरअसल गोरखपुर और आसपास के जिले के ये उद्यमी प्रदेश के विभिन्न स्थानों और प्रदेश से बाहर भी गारमेंट्स उद्योग से जुड़े हुए हैं। जींस, टीशर्ट, ट्राउजर के साथ ही अन्य कपड़ों के उत्पाद वे बना रहे हैं। गोरखपुर रेडीमेड गारमेंट का हब बन रहा है। अब वे पूर्वांचल में आकर अपना उद्यम चलाने के अलावा यहां के युवाओं को रोजगार देना चाहते हैं।

त्रिपुरा में गारमेंट्स उद्योग के कारोबार से जुड़े हरिवंश तिवारी मूलरूप से बड़हलगंज के ग्राम कोड़ारी के निवासी हैं। वह 1963 में ही कारोबार के सिलसिले में त्रिपुरा गए तो वहीं पर रम गए। गारमेंट उद्योग में उनकी अच्छी पकड़ है। हरिवंश का कहना है कि कौन अपने घर नहीं आना चाहता। प्रदेश सरकार अगर सुविधा और स्थान दे तो गीडा में वह अपना उद्योग लगाने को तैयार हैं। यहां उद्योग लगाएंगे तो कम से कम अपने इलाके के लोगों को रोजगार तो दे सकेंगे। प्रदेश की बागडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभालने के बाद काफी सुधार आया। सबसे बड़ा सुधार पारदर्शी व्यवस्था का है।
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पिपरौली (गोरखपुर) के निवासी शमशाद वर्तमान में जयपुर में रेडीमेड गारमेंट का कारोबार करते हैं। शमशाद कहते हैं कि जयपुर में कुर्ता, साड़ी पर छपाई से जुड़ा उनका कारोबार है। पिछले साल सेमिनार में उत्तरप्रदेश आए थे। तभी से गोरखपुर में उद्योग स्थापित करने की प्रबल इच्छा है। गीडा में उद्योग लगाने के लिए कई साल पहले पंजीकरण भी कराया, लेकिन बात आगे न बढ़ सकी। गीडा में जगह मिल जाए तो अपनी मातृभूमि पर पहुंच जाएं और खुद के कारोबार के जरिये लोगों को भी रोजगार दें। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद फिर से हमने प्रयास शुरू किया है।

कप्तानगंज (कुशीनगर) के रामनरेश वर्मा का रेडीमेड कपड़ों का कारोबार छत्तीसगढ़ में है। वे वहां दो दशक से कारोबार कर रहे हैं। रामनरेश बताते हैं कि प्रिंटिंग प्रेस, रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार उनका है। जींस, टीशर्ट बनाकर विभिन्न प्रदेशों में वह बिक्री के लिए भेजते हैं। एक बार गोरखपुर विकास प्राधिकरण भवन में आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए आए थे। तभी से उनकी इच्छा है कि वह गीडा में अपना उद्योग स्थापित करें। उम्मीद है कि जल्द ही इच्छा पूरी हो जाएगी।

मईल, गोहरिया (देवरिया) की अपराजिता वर्मा 12 साल से गाजियाबाद में रेडीमेड गारमेंट्स के अलावा अन्य कारोबार कर रही हैं। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर चुकी अपराजिता बताती हैं कि जब वह यहां अपना कारोबार शुरू कीं तो काफी परेशानियां सामने आईं। गारमेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग एंड प्रोडक्शंस आरा नाम की कंपनी बनाकर वह अपना कारोबार कर रही हैं। गीडा के लिए तो उन्होंने कभी प्रयास नहीं किया, लेकिन अगर यहां स्थान मिल जाए तो नए तरीके से कारोबार का शुभारंभ क रेंगी।  
 
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर और आसपास से जुड़े बहुत से उद्यमी अपना कारोबार अन्य प्रदेशों में कर रहे हैं। उनके यहां आने पर अक्सर बात होती है, वह उद्योग के लिए तैयार भी हैं पर समस्या गीडा में भूमि मिलने की है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान होगा और वह अपना उद्योग गीडा में लगा सकेंगे।
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