प्रतीकात्मक तस्वीर।
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चूहा, बिल्ली और छछूंदर में भी मिल चुके हैं इंसेफेलाइटिस के बैक्टीरिया
इससे पहले चूहा, बिल्ली, छछूंदर में स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया मिल चुके हैं। यह 60 से 65 फीसदी इंसेफेलाइटिस के वाहक हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में चूहे, बिल्ली, छछूंदर बच्चों के संपर्क में भी आ रहे हैं। यही वजह है कि डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि जैसे-जैसे पानी कम होगा वैसे-वैसे इंसेफेलाइटिस के मामले बढ़ने की आशंका है।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह चिंता की बात है, लेकिन अब तक जेई के मरीज नहीं मिले हैं। सभी मरीज एईएस के हैं। टीमें लगाई गई हैं, जो इंसेफेलाइटिस प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक रही है।
एक नजर आंकड़ों पर
- 123 मरीज, नौ मौतें
- जिले के 117 गांव प्रभावित