न्यूरो फिजिशियन डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि क्रिमी टेपवर्म सब्जियों में पाया जाता है। सबसे ज्यादा पत्तागोभी, पालक और फूलगोभी में मिलता है। इन सब्जियों का इस्तेमाल फास्ट फूड में किया जाता है। इसे लोग बिना पकाए ही खाते हैं। इसकी वजह से टेपवर्म भोजन के साथ शरीर में प्रवेश कर जाता है। एक बार यह शरीर में प्रवेश कर गया तो दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
मरीज सिर में तेज दर्द, झटके की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। मरीजों को कई बार मिर्गी के दौरे भी पड़ते हैं। कई बार मरीज बेहोश भी हो जाता है। दिमाग के सीटी स्कैन में इसकी जानकारी मिलती है। यह धीरे-धीरे दिमाग की नसों में गांठें बना लेता है। इसकी सिंकाई भी मुश्किल है।
तेजी से शरीर में फैलता है टेपवर्म
डॉ. सतीश नायक ने बताया कि टेपवर्म का सबसे पहला हमला आंतों पर होता है। इसके बाद यह रक्त प्रवाह के जरिए शरीर की नसों के माध्यम से दिमाग तक पहुंच जाता है। इसके बाद इसकी संख्या दिमाग की नसों में तेजी से बढ़ती है। दिमाग में ज्यादा कीड़े होने के कारण मरीज को तेजी से झटके आते हैं। कई बार डायलिसिस करने का प्रयास भी होता है, लेकिन ये कीड़े ज्यादा तापमान पर मरते हैं। ऐसी स्थिति में डायलिसिस कर पाना भी संभव नहीं होता है और मरीज की मौत तक हो जाती है।