लगातार बढ़ती जा रही भीड़, अनगिनत गाड़ियों की आवाजाही, ट्रैफिक जाम और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं ने शहर के सबसे प्रमुख बाजार गोलघर इलाके को स्वास्थ्य के लिहाज से काफी खतरनाक बना दिया है।
पिछले वर्ष की तुलना में गोलघर इलाके में हवा में प्रदूषण का स्तर 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हालांकि राहत वाली बात यह है कि रियायशी इलाकों में हवा की गुणवत्ता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हुई है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में संचालित नेशनल एंबीएंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम के सहायक वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ यादव ने बताया कि गोलघर इलाके की हवा में धूएं में मिले बारीक धूलकण, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार इस तरह के वातावरण में रहना सांस संबंधी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है।
फिजिशियन डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 की मात्रा बढ़ने से सांस संबंधी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक के अलावा कई अन्य बीमारियां की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों को जहां तक संभव हो मास्क पहनना चाहिए।