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अमर उजाला फाउंडेशन: रक्तदान करने से नहीं होती कोई परेशानी, बचती है दूसरों की जिंदगानी

Sat, 30 Sep 2023 02:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि अभी भी लोगों में यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है। जबकि सही बात यह है कि रक्तदान करने से पहले व्यक्ति के स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच हो जाती है।
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अमर उजाला फाउंडेशन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक अक्तूबर को अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगने वाले इस शिविर में लोग स्वेच्छा से रक्तदान करेंगे। इंडियन रेडक्रास सोसाइटी के सदस्य भी इस शिविर में रक्तदान करेंगे।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि रक्त की एक बूंद भी कृत्रिम रूप से बनाई नहीं जाती है। आवश्यकता पड़ने पर एक इंसान ही दूसरे इंसान को अपना रक्त देकर जान बचाता है। इसलिए इस महादान में हर स्वस्थ व्यक्ति को अपना योगदान करना चाहिए।

जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि अभी भी लोगों में यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है। जबकि सही बात यह है कि रक्तदान करने से पहले व्यक्ति के स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच हो जाती है। रक्तदान करने से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं होती।
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रक्तदान के बारे में ये भी जाने

एक यूनिट में 350 मिलीग्राम खून निकाला जाता है। रक्तदान के बाद खून की कमी 24 घंटे में पूरी हो जाती है। एक यूनिट खून से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायो मिलता है। इन चारों से अलग-अलग चार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। तीन महीने के अंतराल पर ही दोबारा रक्तदान करना चाहिए। रक्तदाता की उम्र 18 से 65 साल के बीच हो, शरीर का वजन न्यूनतम 45 किलो होना चाहिए।

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अब तक 52 बार रक्तदान कर चुके हैं एडवोकेट दिनेश चौधरी
रक्तदान करने से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आती। दीवानी कचहरी के अधिवक्ता दिनेश चौधरी इसकी प्रत्यक्ष मिसाल हैं। अब तक 52 बार रक्तदान कर चुके दिनेश चौधरी बताते हैं कि वे साल में कम से कम दो बार रक्तदान जरूर करते हैं। अब तो कई बार ऐसे लोगों का भी फोन आता है, जिनसे किसी प्रकार की पहचान नहीं होती, लेकिन उनके किसी प्रियजन की जान बचाने के लिए मैं वहां जाकर रक्तदान करता हूं।

इससे जो मन को खुशी मिलती है, उसकाे शब्दों से बयां नहीं कर सकते। इस कार्य के बदले उस व्यक्ति से भी आपका खून का रिश्ता बन जाता है, जिसे आप पहले नहीं जानते थे। दिनेश चंद्र चौधरी के इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें बार एसोसिएशन की तरफ से सम्मानित भी किया जा चुका है।
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