एएसपी ने कहा कि आजकल की सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल फोन ही एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसका इस्तेमाल छात्र जीवन में पढ़ाई के लिए करना चाहिए। इसका आदती नहीं होना चाहिए। नहीं तो इसका असर आप के ही जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बारे में भी जानकारी दी।
बताया कि सोशल मीडिया पर अपने फोटो या वीडियो को शेयर नहीं करना चाहिए। उदाहरण देते हुए बताया कि कोई रिश्तेदार आया तो यह अच्छी बात है, इसे सोशल मीडिया पर डालने से फायदा नहीं। क्योंकि जालसाज इसी व्यक्तिगत जानकारियों को हासिल करके जालसाजी की वारदात करते हैं। स्कूल प्रिंसिपल ज्ञांती सिंह ने कहा कि पुलिस की पाठशाला विद्यार्थियों के जीवन में बहुत कारगर साबित होगी।
इसे भी पढ़ें: किसान आंदोलन: चार-पांच घंटे इंतजार से तिलमिलाए रेल यात्री, पूछते रहे- यह तो बता दो आएगी कब
सवाल (श्रेया राय, दसवीं) : कई बार देखा जाता है कि पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और उन कार्रवाई नहीं होती, ऐसा क्यों?
जवाब : सबके लिए एक ही नियम होता है। नियम तोड़ने पर पुलिस वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
सवाल (अल्का, इंटर) : फेक आईडी से कैसे बचा जाए? पुलिस इस पर जल्दी कार्रवाई क्यों नहीं करती है?
जवाब : अपने व्यक्तिगत फोटो, वीडियो को कभी भी सोशल मीडिया पर साझा न करें। फेक आईडी की शिकायत आते ही पुलिस कार्रवाई करती है। इसकी शिकायत घर बैठे ऑनलाइन भी कर सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: यात्रीगण कृपया ध्यान दें: हमसफर समेत 110 ट्रेनों का समय बदला, जानिए प्रमुख रेलगाड़ियों के शेड्यूल
सवाल (सत्या, 10 वीं) : अपराध होने पर पुलिस जेंडर के हिसाब से कार्रवाई क्यों करती है?
जवाब : कानून सबके लिए एक समान होता है। महिलाओं के अपराध में शामिल होने पर पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरतती है। ऐसे आरोपी को सिर्फ महिला पुलिस ही पकड़ती है। ऐसा कभी भी नहीं होता कि महिला अपराध करे और बच जाए।
सवाल (सृष्टि सिंह, 10वीं) : ऑनलाइन जालसाजी से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
जवाब : अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी को मत दीजिए। अगर, इसके बाद भी जालसाजी हो जाती है, तो सूचना तत्काल पुलिस को देनी चाहिए।