बगीचे में मृत पड़े चमगादड़ों को कुत्ते उठाकर ले जा रहे हैं। यही कुत्ते आबादी क्षेत्र में भी घूमते हैं। इससे गांव व आसपास के क्षेत्र के लोग डरे हैं। बाग के समीप रहने वाले संतोष सिंह, सुभाष चंद्र गुप्ता, गुजरी, रविंद्र, रमेश चंद्र, भान सिंह के मुताबिक मरे चमगादड़ों की बदबू के कारण रहना मुश्किल हो गया है।
गोपलापुर में चमगादड़ों का मरना जारी
जानीपुर। गोला थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरईपुरा उर्फ पड़ौली के राजस्व गांव गोपलापुर में चमगादड़ों के मरने का सिलसिला जारी है। इससे लोगों में दहशत है। कुछ स्थानीय युवकों ने बुधवार को गड्ढा खोदकर मरे चमगादड़ों को दफनाया। गांव के राणा यादव ने बताया कि मंगलवार रात करीब आठ बजे वन विभाग और गोला के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी आए। दो चमगादड़ों को जांच के लिए ले गए। रवि प्रताप राय ने बताया कि कभी भी इतनी बड़ी संख्या में चमगादड़ों को मरते हुए नहीं देखा।
भारत में पाए जाते हैं तीन तरह के चमगादड़
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. समदर्शी सरोज बताया कि चमगादड़ ज्यादा गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। यह छायादार वृक्ष पर रहते हैं। भारत में तीन तरह के चमगादड़ पाए जाते हैं। एक कीट भक्षी होते हैं। दूसरा जंगली जानवरों का रक्त चूसते है और तीसरा जो फल और सब्जी खाते हैं। वन रेंजर ज्ञानेश्वर शुक्ल ने बताया कि कीटनाशक के छिड़काव की वजह से भी उनकी मौत हो सकती है। जांच के बाद ही इसका पता चल पाएगा।