अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच हुई 60 से अधिक बच्चों की मौत मामले में आरोपी बनाए गए डॉ. कफील खान इसके बाद ही सुर्खियों में आए थे।
उन पर आरोप था कि हंड्रेड बेड वार्ड का चार्ज उनके पास था और ऑक्सीजन की कमी की जानकारी होने के बाद भी सही समय पर अफसरों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी की गई और आपराधिक साजिश का मुलजिम बनाए गया।
जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानाचार्य राजीव मिश्रा समेत अन्य लोग भी इसमें आरोपी बनाए गए थे। जमानत पर रिहा होने के बाद डॉक्टर कफील बाहर आते ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिए और एक दिन अचानक बहराइच के जिला अस्पताल पहुंच गए और वहां पर बच्चों की जांच और व्यवस्था की चेकिंग करने लगे।
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इसकी जानकारी होने पर वहां केएसआईसी ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और एफआईआर दर्ज कराया था। इसके बाद से ही वह कई मामलों में फंसते चले गए और उनके ऊपर मथुरा में रासुका की कार्रवाई कर दी गई।
अब हाईकोर्ट ने रासुका को रद्द करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया है। डॉ. कफील के भाई ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह सच्चाई की जीत है।