अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में तैनात एक डॉक्टर की डिग्री के फर्जी होने की आशंका है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि डॉक्टर ने नियुक्ति के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र भी लगाया था। एम्स प्रशासन की ओर से कराई गई जांच पूरी हो गई है। जांचकर्ता ने रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दी है। माना जा रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की आंच में कई और लोग आ सकते हैं।
मार्च 2023 में शिकायत हुई थी कि एम्स में तैनात किए जा रहे एक डॉक्टर ने डिग्री और अनुभव प्रमाणपत्र फर्जी लगाए हैं। इसके बाद एम्स प्रशासन ने जांच शुरू करा दी। सूत्रों के मुताबिक, जांच में नए-नए पहलू जुड़ते गए। पता चला है कि जिस डॉक्टर की शिकायत हुई है, एम्स ऋषिकेश में भी उस डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जांच चल रही है। पहले वह वहीं तैनात थे। डॉक्टर ने नियुक्ति के समय यह तथ्य छिपाए थे।
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डॉक्टर ने अपनी एमडी की डिग्री साल 2009 में मिली बताई। इस आधार पर नियुक्ति में अनुभव का लाभ लिया। जबकि, जांच में पाया गया कि डॉक्टर को 2011 में एमडी की डिग्री मिली थी। इस हिसाब से उनके पास एम्स में नियुक्ति के लिए पर्याप्त अनुभव नहीं है। जांच में यह भी पाया गया है कि डॉक्टर ने जो डी-लिट की डिग्री कैलिफोर्निया पब्लिक यूनिवर्सिटी से प्राप्त की है, उस नाम की कोई भी अप्रूव कोर्स यूनिवर्सिटी में नहीं है।
एम्स एवं जांचकर्ता सदस्य गवर्निंग काउंसिल डॉ. अशोक जाह्नवी प्रसाद ने कहा कि एम्स के डॉक्टर के खिलाफ जांच मुझे सौंपी गई थी। कई बिंदुओं पर गड़बड़ी मिली है। जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दी है।
एम्स मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि एक डॉक्टर की डिग्री के बारे में शिकायत मिली थी। मामले की जांच हाई कमेटी कर ही है। कमेटी ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है।