महाराष्ट्र के किसान जहां गन्ने की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में करते हैं, वहीं गोरखपुर मंडल के किसान सूखी पत्तियों को जलाकर न केवल प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही महाराष्ट्र में प्रशिक्षण के दौरान गन्ने की पत्तियों के जरिए जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के गुर सीखे। अब यह गुर मंडल के किसानों को भी सिखाए जाएंगे।
गोरखपुर मंडल में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। गन्ने की छिलाई के दौरान प्रति एकड़ 40 से 50 क्विंटल तक सूखी पत्तियां निकलती हैं। इन पत्तियों का कोई उपयोग नहीं होने के चलते आमतौर पर किसान इसे खेत में जला देते हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि संस्थान का एक प्रतिनिधि मंडल प्रशिक्षण के लिए महाराष्ट्र गया था। वहां बसंत दादा शर्करा संस्थान एवं गन्ना अनुसंधान संस्थान पूना में प्रशिक्षण के दौरान गन्ने की पत्तियों पर चर्चा की गई।
महाराष्ट्र में किसान गन्ने की छिलाई के बाद सूखी पत्तियों को ट्रेस कटर मशीन से काटकर भूसे की तरह बना लेते हैं। इसे खेत में बिछाकर सिंचाई के बाद खेत की जुताई करा देते हैं। इससे सूखी पत्तियां मिट्टी में सड़कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ा देती हैं।