डीजे के काम से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर में 200 से अधिक लोग हैं, जो डीजे की बुकिंग करते हैं। इसमें कई टेंट हाउस कारोबारी भी है। जो डीजे का सट्टा बुक करते हैं। करीब हर दुकान से चार से पांच डीजे सेट की बुकिंग हुई है। लेकिन इनमें उपकरणों की संख्या की घट गई है। सामान्य तौर पर डीजे का 20 से 25 हजार रुपये किराया है। लेकिन पूरा मामला पांच से सात हजार पर सिमट गया है।
दुर्गाबाड़ी धर्मशाला रोड पर साउंड के दुकानदार हैं। शुक्रवार की दोपहर 12.40 बजे डीजे की दुकान पर धीरू मिले। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अधिक साउंड बॉक्स की बुकिंग न करने की हिदायत दी है।
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त्योहार में एक दूसरे की होड़ में जमकर डीजे बजता था। प्रतिमा विसर्जन के दौरान फूहड़ गाने भी बजाने लगते थे। प्रशासन की सख्ती के बाद डीजे का शोर पंडालों में थम गया है। शुक्रवार को भी पंडालों में दो साउंड बॉक्स ही नजर आए। इनमें बेहद ही धीमी आवाज में गाने बजाए जा रहे थे। हालात यह है कि पंडाल के सामने से गुजरने पर ही भक्ति गीत सुनाई पड़ रहे हैं।
डीजे की तेज आवाज के खिलाफ अभियान का असर नजर आ रहा है। डीजे की दुकानों की बुकिंग में साउंड बॉक्स की संख्या की कम हो गई है। पूर्व में कई लोगों ने छह- छह साउंड बॉक्स की बुकिंग कराई थी। लोगों ने दो साउंड बाक्स के अलावा अन्य के लिए जमा एडवांस रकम को वापस मांगना शुरू कर दिया है।
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श्याम स्पीकर धीरू ने कहा कि डीजे की तेज आवाज पर रोक लगने से बुकिंग में सामान की संख्या घट गई है। ऑपरेटर के साथ डीजे का सट्टा बुक करने में खर्चा निकलना मुश्किल है। लेकिन यह अच्छी बात है कि लोग धीमी आवाज में कम स्पीकर बजाएंगे तो किसी को असुविधा नहीं होगी।
पन्ना साउंड विनोद कुमार ने कहा कि बुकिंग में कमी नहीं आई है। लेकिन उपकरण ज्यादा नहीं लगेंगे। इसलिए कमाई पर असर पड़ा है। अधिकांश लोग छोटे स्पीकर लगा रहे हैं। इसलिए एडवांस में दी गई रकम भी वापस लौटाने को कह रहे हैं। 15 से 20 हजार में बुक होने वाले सेट की जगह अब पांच से छह हजार रुपये मिल रहे हैं।
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राहगीर विपिन राय ने कहा कि तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक से राहत मिली है। पंडालों से गुजरने पर मधुर आवाज सुनाई पड़ रही है। इससे किसी को असुविधा नहीं होगी और अच्छा भी लग रहा है।
राहगीर शशांक सिंह ने कहा कि गोरखपुर शहर में अभी तक कहीं पर भी डीजे का शोर सुनने को नहीं मिला है। इससे माहौल काफी अच्छा है। पंडाल से गुजरने पर भी अच्छा लग रहा है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान भी इसी तरह की स्थिति रहनी चाहिए।