उत्पन्ना एकादशी व्रत का पर्व मंगलवार को मनाया जा रहा है। श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की आराधना करेंगे। पद्मपुराण के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से सभी व्रतों का फल मिलता है। सभी प्रकार के दुखों का नाश होता है और श्रद्धालु को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस दिन हस्त नक्षत्र और आयुष्मान नामक औदायिक एवं सौम्य नामक महाऔदायिक योग है। यह दोनों योग श्रद्धालुओं का रोगों से छुटकारा दिलाकर दीर्घायु प्रदान करेंगे।
व्रत का माहात्म्य
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस एकादशी का माहात्म्य अनेक पुराणों में वर्णित है। इस दिन के उपवास से सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। इस दिन दिया गया दान सहस्त्र गुना होकर प्राप्त होता है। इस एकादशी के माहात्म्य को श्रवण करने से सहस्त्र गोदान का फल प्राप्त होता है।
एकादशी व्रत पूजन विधि
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यह व्रत मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। व्रती को दशमी के दिन रात को भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत के दिन ब्रह्म बेला में उठकर दैनिक कर्म स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान श्रीकृष्ण को जल, चंदन, धूप, रोली, अक्षत आदि से विधिवत पूजन करें। व्रती एकादशी के दिन व्रत रखकर केवल फलाहार करें। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित किया गया है।