प्रेम की बेटी अर्चना ने कहा कि मेरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे। अन्य लोग जेल में हैं। गेट पर लाल निशान लगा दिया गया और नोटिस चस्पा कर दिया गया है। पापा हमारे सभी के दुख-सुख में शरीक होते थे। इस नाते 17 तारीख को ब्रह्मभोज में काफी संख्या में लोग और नेता भी आएंगे। हमारी मांग है कि हमारे घर आने वाले लोगों को आसानी से आने दिया जाए। किसी को परेशान न किया जाए।
प्रेम की पत्नी शीला ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के चलते भय का माहौल बन गया है। हमारे पति को जानने वालों की इच्छा होने के बावजूद भी गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा है। लोग फोन करके बता रहे हैं कि धारा 144 का हवाला देकर न पहुंच पाने का खेद जता रहे हैं। पत्नी ने मांग की है कि मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए हिंदू रीति रिवाज से पति का ब्रह्मभोज कराने में मदद करें। जबकि दूसरी तरफ उसने कहा कि प्रशासन की पैमाइश के बाद आए एकपक्षीय फैसले से बच्चे दहशत में हैं।
अगर मकान पर बुलडोजर चल गया तो हम बर्बाद हो जाएंगे। एक तो पति की हत्या होने तो दूसरी तरफ छत भी गिर जाएगी तो मेरी दुनिया ही उजड़ जाएगी। कम से कम प्रशासन और शासन को हमारे ऊपर विचार करना चाहिए। मेरे मासूम बच्चे और मैं कहां जाऊंगी। अब तो पति भी नहीं रहे।