प्राकृतिक आपदा से गन्ना किसानों को होने वाले नुकसान का मुआवजा दिलाने के लिए फसल बीमा योजना में गन्ने की फसल को भी शामिल कराना जरूरी है। इस संबंध में प्रगतिशील गन्ना किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल केन यूनियन की अगुवाई में जल्द ही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मिलकर यह मांग रखेगा।
गोरखपुर-बस्ती मंडल में गन्ना मुख्य नकदी फसल है। करीब एक लाख 17 हजार हेक्टेयर में गन्ना की बुआई होती है। इस वर्ष रेड रॉट बीमारी से करीब 26 हजार हेक्टेयर फसल सूख गई है। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। पिछले साल 20 हजार हेक्टेयर फसल सूखी थी। पिछले साल सितंबर में मुख्यमंत्री की जन प्रतिनिधियों की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। मुख्यमंत्री योगी ने किसानों की दिक्कत को देखते हुए रिपोर्ट भी मांगी थी। बाद में सब ठंडे बस्ते में चला गया।
गन्ना विभाग के अफसरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में यदि गन्ना भी शामिल होता तो किसानों को कुछ न कुछ आर्थिक मदद जरूर मिल जाती। कृषि विभाग के अफसरों का दावा है कि सरकार ने वर्ष 2016 में प्रीमियम की दर अधिक होने के चलते, गन्ने की फसल को सूची से बाहर कर दिया था। पिछले दो वर्षों से गन्ना किसानों को हो रहे नुकसान को देखते हुए अमर उजाला की पहल पर केन यूनियन हाटा (कुशीनगर) के चेयरमैन विवेक सिंह बंटी आगे आए हैं। बंटी सिंह ने बताया कि जल्दी ही प्रगतिशील किसानों व अन्य केन यूनियन पदाधिकारियों के साथ कृषि मंत्री से मिलकर किसानों की समस्या से अवगत कराया जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गन्ने को भी शामिल कराने व प्रीमियम की दर न्यूनतम रखने की मांग की जाएगी।
खड्डा विधायक भी कर चुके हैं मांग
गन्ना किसानों की इस मांग से संबंधित पत्र कुशीनगर की खड्डा सीट से भाजपा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी शासन को लिख चुके हैं। विधायक ने बताया कि पिछले साल खड्डा क्षेत्र में बड़ी संख्या में गन्ने की फसल सूखी थी। ऐेसे में किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए, उन्होंने मुख्यमंत्री राहत आयुक्त व कृषि उत्पादन आयुक्त को पत्र लिखा था। पुन: इस ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।