बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इसी साल खोला गया नशा मुक्ति केंद्र बंद हो गया है। बजट के अभाव में केंद्र में भर्ती सभी मरीजों को घर भेज दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने फैसला लिया है कि जब बजट मिलेगा तभी केंद्र चलाया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, इसी साल फरवरी माह में जिले के प्रभारी मंत्री रमापति शास्त्री ने मेडिकल कॉलेज में नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन किया था। निशुल्क चलने वाले इस केंद्र में 30 बेड की व्यवस्था की गई थी। शुरुआती दिनों में केंद्र में कुछ मरीज भर्ती हुए। लेकिन इसके बाद बजट के कारण मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया गया। बताया जाता है कि राज्य सरकार ने इस केंद्र के संचालन से हाथ पीछे खींच लिए हैं। प्रदेश सरकार ने इस केंद्र के संचालन का जिम्मा केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय को दिया है। वही, दूसरी ओर केंद्र के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय ने नशा मुक्ति केंद्र के संचालन को लेकर कोई जवाब नहीं दिया है। इसकी वजह से बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने स्थित नशा मुक्ति केंद्र के सभी मरीजों को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया है। इतना ही नहीं केंद्र के संचालन में तैनात डॉक्टर समेत 14 कर्मचारियों को पांच महीने से वेतन तक नहीं मिला है।
33 लाख रुपये हुए थे आवंटित
पूर्वांचल के युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गई थी। यह केंद्र 30 बेड का शुरू हुआ था। इसे बढ़ाकर 60 बेड करने के निर्देश शासन की तरफ से मिले थे। इस केंद्र के निर्माण के लिए राज्य मद्यनिषेध विभाग की तरफ से 33 लाख रुपये आवंटित भी हुए थे। केंद्र के निर्माण के बाद इसके संचालन के लिए रकम आनी थी। लेकिन अब तक कोई रकम नहीं मिली है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के संचालन के लिए बजट नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को डिस्चार्ज किया गया था। बजट के लिए शासन को पत्राचार किया जाएगा। जैसे बजट आता है वैसे ही केंद्र का संचालन फिर शुरू किया जाएगा।