उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जेल में एक- एक कैदी का नाम और बैरक जुबान पर याद रखने वाले आदर्श कैदी शेषनाथ उर्फ दाढ़ी (69) और वंश बहादुर (65) शुक्रवार को रिहा हो गए। गोरखपुर मंडलीय कारागार में हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे दोनों ही आदर्श कैदी थे। दोनों को शासनादेश के अनुपालन में पचास हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, बस्ती के हरैया निवासी शेषनाथ और बड़हलगंज के बेलवा निवासी वंशबहादुर यादव हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। शेषनाथ उर्फ दाढ़ी 28 साल के उम्र में ग्यारह दिसंबर वर्ष 1981 में हत्या के मामले में जेल आये थे, जहां उसको 1982 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
इस दौरान करीब छह साल सेंट्रल जेल वाराणसी में रहे, उसके बाद प्रशासनिक आधार पर गोरखपुर जेल में भेज दिया गया था। तभी से शेषनाथ गोरखपुर जेल में सजा काट रहे थे। वहीं वंशबहादुर 28 मार्च 2005 को हत्या के मामले में जेल आए, जहां करीब 17 साल की सजा गोरखपुर जेल में काट चुके है। इन दोनों को शासनादेश पर जेल प्रशासन ने रिहा कर दिया। गोरखपुर जेल प्रशासन की ओर से चार बंदियों का नाम शासन के आदेशानुसार गया था।
हर बैरक और कैदी का नाम उन्हें है याद
शेषनाथ जेल में अपने अच्छे व्यवहार की वजह से दाढ़ी बाबा के नाम से मशहूर हो गए थे। उन्हें जिला जेल का 'गूगल' भी कहा जाता था। एक-एक बैरक और किस बैरक में किस नाम का कैदी/बंदी है, यह सब दाढ़ी बाबा को याद है। अपने अच्छे व्यवहार और तेज दिमाग के चलते उन्हें आदर्श कैदी का दर्जा मिला था। जब जेल के अन्य लोगों को किसी कैदी को खोजने में घंटों लग जाता था, तब दाढ़ी को याद किया जाता था और चंद मिनटों में ही बता देते थे, वह कहां पर हैं।