पर्यावरणविद् प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि धूल उड़ने और वाहनों के प्रदूषण से एयर क्वालिटी इंडेक्स प्रभावित होता है। त्योहारों में खूब चहल पहल रहती है। शहर में सड़क सहित अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं। इस दौरान जब लोग निकले हैं तो खूब धूल उड़ी है। वाहनों का आवागमन भी बढ़ा है। उत्तर प्रदेश पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में हवा की गुणवत्ता मॉडरेट हुई है।
शहर में जगह जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन जगहों पर धूल न उड़े। इस संबंध में कार्यदायी संस्थाओं को नियमित पानी का छिड़काव करने को कहा गया है। खेतों में फसलों के अवशेष जलाने पर रोक लगाई गई है। मौसम में बदलाव हो रहा है। साथ ही वाहनों की आवाजाही भी बढ़ी है। इसका असर नजर आ रहा है।
-अनिल शर्मा, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
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वायुमंडल में धूल के कण उड़ेंगे तो सांस लेने में दिक्कत होगी। इससे दमा के मरीजों को विशेष परेशानी होती है। इसके अलावा धूल के कणों से एलर्जी भी होती है, जिससे सर्दी-खांसी के मरीज बढ़ जाते हैं। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि धूल वाले स्थानों से गुजरते वक्त अपने मुंह पर मास्क लगाएं या रुमाल रख लें, जिससे कि कम से कम परेशानी हो।
- डॉ. राजेश कुमार, जनरल फिजिशियन, जिला अस्पताल