गोरखपुर में मंगलवार को एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां खजनी थाने पर तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार शुक्ला और सिपाही राधेश्याम यादव के गठजोड़ से आमजनमानस परेशान हो गया था। मामला शासन तक पहुंचा तो एडीजी ने सीओ कैंट सुमित शुक्ला को जांच सौंपी थी।
जांच में पता चला कि इंस्पेक्टर का कारखास सिपाही ही थाना संचालित कर रहा है और इंस्पेक्टर सिर्फ हस्ताक्षर ही करते है। जांच रिपोर्ट आने के बाद एडीजी ने प्रदीप शुक्ला को श्रावस्ती और सिपाही का गोंडा तबादला कर दिया है। एडीजी की कार्रवाई से पुलिस कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, खजनी थाना के प्रभारी रहे इंस्पेक्टर प्रदीप शुक्ला के खिलाफ शासन में शिकायत हुई थी। आरोप था कि लंबे समय से थाने पर तैनात रहते हुए वह एक तरफा कार्रवाई कर रहे हैं। सिर्फ कुछ लोगों की ही बात सुनी जाती है जिस वजह से न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनकी मौजूदगी में पूरा थाना सिपाही राधेश्याम यादव के हाथ में है।
बतौर कारखास वह पूरा सिस्टम चला रहा है। सीएम पोर्टल पर शिकायत होने के बाद एडीजी को जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया गया था। एडीजी ने जांच का जिम्मा सीओ कैंट को सौंपा और जांच रिपोर्ट आते ही कार्रवाई कर रही है।
जोन एडीजी दावा शेरपा ने कहा कि शासन में शिकायत के बाद गोपनीय जांच कराई गई थी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर इंस्पेक्टर और सिपाही को गोरखपुर रेंज से बाहर भेजा गया है।