- 20 नवंबर 2000: खोराबार के शिवाजीनगर में राकेश राय के परिवार के सात लोगों की हत्या कर लूटपाट की गई।
- 21 अक्तूबर 2001: गोरखनाथ इलाके के वृंदावन कॉलोनी में तीन लोगों की हत्या कर डकैती हुई।
- अक्तूबर 2010: गुलरिहा के लक्ष्मीपुर में संजीव श्रीवास्तव के घर के सदस्यों पर जानलेवा हमला कर लूटपाट।
- वर्ष 2011: चिलुआताल इलाके के ग्रीन सिटी में हत्या कर लूटपाट की गई।
- नवंबर 2015 : बेलीपार के मेहरौली में लालजी पाल के बेटे श्रीराम की हत्या कर लूट की गई। चार महिलाओं पर जानलेवा हमला हुआ था।
- 19 अक्तूबर 2015: 19 अक्तूबर 2015 को पिपराइच के महमूदाबाद में मुंशीलाल व हनुमान पाल के घर में आठ लोगों को घायल कर डकैती हुुई थी।
(कुशीनगर जिले के तमकुही राज में भी बावरिया गिरोह ने छह लोगों को घायल कर लूटपाट की थी।)
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बावरिया गिरोह के बदमाश पहले शहर के बाहरी इलाकों में डेरा डालते हैं। गिरोह की महिलाएं खिलौने, कागज के फूल आदि बेचने के बहाने टोलियों में अलग-अलग इलाकों में जाकर रेकी करती हैं। लक्ष्य चिन्हित करने के बाद डकैती डालने से पहले लोहे की सरिया और अपने विशेष नुकीले औजारों की पूजा करते हैं।
रात के दो बजे के आसपास महिला सदस्यों के साथ गिरोह के पुरूष सदस्य निकलते हैं। चिन्हित मकान के पास से पेड़ की हरी डाल तोड़ते हैं। घर में दाखिल होते ही सो रहे लोगों के चेहरे पर टार्च की रोशनी डालते हैं और सिर पर प्रहार कर हत्या करते हैं। ये इतने क्रूर होते हैं कि छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ते।
एक जिले में एक घटना को अंजाम देकर दूसरे जिलों में चले जाते हैं। बावरिया गिरोह के सदस्य यदि किसी मकान को निशाना बनाते हैं तो वहां बिना खून बहाए वापस नहीं आते। खून गिराना ये अपने लिए शुभ मानते हैं। गोरखपुर में वर्ष 2000 में शिवाजी नगर की घटना के बाद तत्कालीन एसएसपी विजय कुमार ने बावरिया गिरोह की गतिविधियों पर आधारित एक पुस्तक लिखी थी। गिरोह की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए वह वाराणसी तक गए थे।
ये बरतें सावधानियां...
- अगर फेरी वालों से सामान खरीद रहे हैं तो उन्हें घर के अंदर ना आने दें।
- भीख मांगने वाली महिलाओं व बच्चों से सतर्क रहें।
- पड़ोसियों व रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर अपने पास रखें ताकि जरूरत पर काम आ सके।
- कोई आवाज होने पर हड़बड़ी में दरवाजा न खोलें। संदेह होने पर घर के अंदर व बाहर की लाइट जला दें और तत्काल पड़ोसी, रिश्तेदार व पुलिस को सूचना दें।
वैसे तो पुलिस हमेशा सतर्क रहती है, लेकिन ठंड को देखते हुए पुलिस को और सतर्कता बरतने को कहा गया है। रात्रि गश्त बढ़ाने व सीओ तथा थानेदार को रात के समय भ्रमणशील रहने को कहा गया है।
- दावा शेरपा, एडीजी जोन