पीड़ित किशोरी ने बताया कि अब वह लोग उसे पैसों के लिए दूसरी जगह ले जाते हैं और दूसरे लोगों के साथ सोने को मजबूर करते हैं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हैं। विरोध के कारण कई बार लाठी और बेल्ट से उसकी पिटाई की गई। उसने बताया कि उसे हाल ही घर से निकाल दिया, वह दूसरी जगह रहने लगी तो जबरिया वहां से ले जाकर उससे धंधा कराया जाता है। सीएम कैंप कार्यालय प्रभारी ने उसकी बात सुनने के तुरंत बाद थानाध्यक्ष तिवारीपुर, नासीर हुसैन को फोन लगाया। कहा कि उनके थाना क्षेत्र में रहने वाली एक गरीब किशोरी के साथ इस तरह का अन्याय हो रहा है। इस पर तुरंत कार्रवाई कर उन्हें अवगत कराएं।
पुलिसवाले मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की भी नहीं सुनते
हैरत की बात है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से शिकायत मिलने के बाद भी तिवारीपुर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 13 साल की लड़की सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत कर रही है। किशोरी कह रही है कि उसे दो लोगों ने दुष्कर्म का शिकार बनाया और अब उसे दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हो सकता है कि किशोरी सिरे से झूठ बोल रही है, मगर क्या ऐसे गंभीर आरोप पर थाना इंचार्ज को भागते हुए मौके पर नहीं जाना चाहिए था? तथ्यों को समझकर मुकदमा दर्ज करके मेडिकल नहीं करवाना चाहिए था? मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक क्या आगे की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी? पुलिस की इस सक्रियता से सब दूध का दूध, पानी का पानी हो जाता।
इसके ठीक उलट इंस्पेक्टर ने एक एसआई को मौके पर भेज दिया, उसने आकर उन्हें बता दिया कि किराएदारी का विवाद लग रहा है। कोई वैज्ञानिक जांच पड़ताल नहीं, बस इंस्पेक्टर महोदय ने मान लिया कि ये किराएदारी का विवाद है। अमर उजाला संवाददाता ने इंस्पेक्टर से इस बाबत पूछा तो बड़ी कैजुअली बोले- ये तो किराएदारी का विवाद लग रहा है। लड़की के परिवारवालों को बुलाया था, वे आए ही नहीं। जब उनसे पूछा गया कि लड़की का परिवार तो कहीं और रहने लगा, फिर कैसा विवाद? इस पर इंस्पेक्टर नासीर बोले- कोई मिल गया होगा कि चलो वहां अप्लीकेशन दे दो, दबाव बन जाएगा।
सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से आया मामला और पुलिस का ऐसा रवैया, आप क्या कहेंगे? इस सवाल पर अनायास ही किसी की भी जुबान पर शायद यही जवाब आएगा, ऐसे ही पुलिसवालों के चलते सरकार को हाथरस में फजीहत झेलनी पड़ी थी। पुलिस की ऐसी निष्क्रियता के चलते ही विपक्ष को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गृह जनपद में घेरने का बैठे बिठाए मौका मिल जाता है। हां, आप एक बार जरूर सोचिएगा, मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय से भेजे गए फरियादी को लेकर पुलिस का ऐसा रवैया है तो आम आदमी की शिकायत पर क्या होता होगा?