गोरखपुर में हत्या के दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज हो गई। एक मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सत्यानंद उपाध्याय तो दूसरे की अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ला कर रहे थे।
चौरीचौरा क्षेत्र के ग्राम रउतैनिया सरदार निवासी आरोपी मिथुन पासवान की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज हो गई है। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनीष मिश्रा का कहना था कि पांच जून को रात करीब साढ़े नौ बजे बलवंत पांडेय उर्फ गुड्डू पांडेय ने अपनी भांजी दिव्या दूबे की आत्महत्या के संबंध में डॉयल 112 नंबर पर सूचना दी थी।
वादी को बाद में पता चला कि उसकी भांजी दिव्या दूबे के नाम से कई जगह जमीन थी, जिसे उसका बड़ा भाई आकाश दूबे बेचना चाहता था लेकिन वादी की भांजी उसे बेचने नहीं दे रही थी। इसी रंजिश में आकाश दूबे ने अपने मकान पोखरा टोला खोराबार में अपने दोस्तों के साथ मिलकर दिव्या दूबे की गला कसकर हत्या कर दी। दौरान विवेचना मिथुन पासवान का नाम प्रकाश में आया। अपर सत्र न्यायाधीश सत्यानंद उपाध्याय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
इसके अलावा अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ल ने गोरखनाथ क्षेत्र के अमरूतानी भौरहिया झोपड़पट्टी निवासी आरोपी एबरार उर्फ राजू की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दी।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अतुल शुक्ला का कहना था कि 28 अगस्त 2021 को वादी गुड्डू की लड़की रूबी खातून अपनी दोस्त निशा के साथ आधार कार्ड बनवाकर घर वापस आ रही थी। रास्ते में घर के पास ही उसके दामाद एबरार ने लोहे की सरिया से लड़की के सिर पर मार कर उसे घायल कर दिया। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।