गरीबों की आह नहीं दुआएं लें, मुख्य सचिव बन जाएंगे
नगर निगम बोर्ड बैठक की बैठक में घंटाघर के पार्षद जियाउल इस्लाम ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। बोले-गरीबों और जरूरतमंदों के साथ पुलिस और नगर निगम ज्यादती कर रही है। उन्हें मारा-पीटा जा रहा है। इनकी आह लेने से बचें। दुआएं लेंगे तो यहां से जाने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव भी बन सकते हैं। इस पर ठहाके लगे। जीआईएस सर्वे पर उन्होंने मेयर को घेरा। कहा-वार्ड संख्या 12 में निशा खातून के 350 वर्ग फीट में बने मकान पर जीआईएस सर्वे की नोटिस भेज दिया गया, जबकि 358 वर्ग फीट के बाद ही संपत्ति कर कर लागू होता है। ऐसे में मनमाने तरीके से निजी फर्म लोगों को डरा रही है, इसे बंद किया जाए।
सुंदरीकरण के चक्कर में नाम हटा दे रहे...ऐसा क्यों
सिविल लाइंस के पार्षद अजय राय ने नगर आयुक्त से सवाल किया कि स्व. कल्पनाथ राय के नाम पर विश्वविद्यालय चौराहा था, उस नाम को क्यों हटाया गया? नगर आयुक्त ने शहर के चौराहों से विज्ञापन और अन्य प्रचार-प्रसार से राजस्व का लाभ बताकर आंकड़े बताए। नगर निगम के आत्मनिर्भर बनने की बात कही। इस पर पार्षद ने पूछा कि चौराहों के सुंदरीकरण की फाइल को क्या बोर्ड या कार्यकारिणी में रखी गई थी।
नगर आयुक्त ने नगर निगम के हित का हवाला देते हुए बताया कि ये अधिकारी सभी पार्षदों और नगर आयुक्त का होता है, नगर निगम को बेहतर की तरफ ले जाएं। इसी के तहत किया गया। लेकिन, किसी चौराहे के नाम को नहीं बदला जाएगा। सुंदीकरण प्रचार- करने वालों को इसका ध्यान रखना होगा। सहमति के बाद पार्षद बैठ गए। वहीं, वार्ड नंबर 70 के पार्षद अजय ओझा ने कहा कि वे अपने मकान निर्माण के दौरान घर के सामने रखी गिट्टी रखवाए थे। नगर निगम ने गिट्टी उठवा लिए। अगले दिन जब नगर आयुक्त से इसे लेकर शिकायत की तो गिट्टी वापस की गई। सदन के पार्षद के साथ इस तरह का व्यवहार कितना ठीक है।