भ्रष्टाचार उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले तहसील के कुछ अधिकारी भी शामिल
आरोप है कि डीएम के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय में भ्रष्टाचार को उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले तहसील के कुछ अधिकारी भी अपने कार्यालयों में बाहरी लोगों से काम लेते हैं। सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार कार्यालय के साथ ही कानूनगो, लेखपाल भी ऐसे लोगों से काम लेते हैं। हर लेखपाल के पास एक से दो मुंशी हैं, जो जाति, आय, निवास समेत सभी प्रमाण पत्रों और कई अन्य मामलों में रिपोर्ट लगाने से लेकर कई अन्य गोपनीय कार्य कर रहे हैं। दूसरे विभागों का भी ऐसा ही हाल है।
हालांकि, संसाधनों की आड़ में गलत को सही बताने की दलील पर डीएम विजय किरन आनंद का कहना है कि किसी भी विभाग में कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं कर सकता है। बैठकों में सभी को निर्देश दिए जाते हैं कि कार्य में यदि किसी तरह की दिक्कत आ रही है तो आला अफसरों से बताएं, उसे दूर कराया जाएगा। यदि कहीं पर बेवजह जनता को परेशान करने, उनसे सुविधा शुल्क आदि के नाम पर वसूली का मामला पकड़ में आया तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रजिस्ट्री विभाग के आला अफसरों पर भी उठ रहे सवाल
आरटीओ के साथ ही कलेक्ट्रेट मुख्यालय परिसर स्थित सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय में भ्रष्टाचार के संबंध में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के आला अफसरों पर भी सवाल उठने लगे हैं। उप निबंधक कार्यालय के ठीक ऊपर के तल पर डीआईजी स्टांप और एआईजी स्टांप का कार्यालय है। एक ही भवन में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा खेल सामने आने पर चर्चा आम है कि आला अफसर किस तरह की निगरानी कर रहे थे?
एआईजी स्टांप कमलेश शुक्ला का कहना है कि कार्रवाई होने तक उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि विभाग की नियमित समीक्षा के साथ औचक निरीक्षण किया जाता है। कार्यालय में अधिकारियों, कर्मचारियों, बैनामा कराने आने वाले क्रेता-विक्रेता, गवाह, डीड लेखक और अधिवक्ताओं के अलावा किसी बाहरी के दाखिल होने पर सख्ती है। किसी को भी गलत करने की छूट नहीं है। अब निगरानी और कड़ी कर दी जाएगी। कोई भी संदिग्ध मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
जमीन के भू-प्रयोग के खेल में भी हेरफेर
आवासीय जमीन की भू-प्रवृत्ति छिपाकर उसे कृषि बताकर भी स्टांप ड्यूटी में गोलमाल किया जाता है। कई जगह की कृषि जमीन के आसपास आबादी विकसित हो जाने से उस पर स्टांप ड्यूटी आवासीय के मुताबिक निर्धारित की जाती है। रजिस्ट्री विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों में भी लेनदेन कर जमीन की रजिस्ट्री, कृषि दिखाकर कर दी जाती है। जमीन पर पेड़ लगे होते हैं, तो भी स्टांप ड्यूटी अधिक लगती है। यदि कच्चा मकान या चहारदीवारी है, तो भी स्टांप ड्यूटी की राशि बदल जाती है। मगर सूचनाएं छिपाकर इसमें हेरफेर कर दिया जाता है। बैनामा हो चुकी जमीनों के निरीक्षण में भी सांठगांठ कर स्टांप ड्यूटी का खेल खेला जाता है।