तहसीलों में जाति, आय, निवास प्रमाणपत्र जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए लेखपालों के अनाधिकृत मुंशी के माध्यम से आवेदकों से सुविधा शुल्क वसूलने की शिकायतें भी आती रहती हैं। इसी तरह, जमीन की पैमाइश, हैसियत प्रमाण पत्र, शस्त्र आदि मामलों में आवेदकों की जांच के काम में भी तहसीलों के अधिकारी-कर्मचारियों पर सवाल उठते रहते हैं। अब इन सभी विभागों की कार्यप्रणाली की डीएम खुद निगरानी कर रहे हैं।
संबंधित विभागों में भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए गोपनीय तरीके से वहां की कार्यप्रणाली की सभी सूचनाएं एकत्रित कराई जा रही हैं। इन सूचनाओं के आधार पर ही गोपनीय टीम से मामले की जांच कराई जाएगी। स्टिंग कराने के साथ ही फोन कॉल की भी रिकार्डिंग कराई जाएगी। कहीं भी गड़बड़ी या रुपये वसूलने की पुष्टि हुई तो कार्रवाई तय है।
डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि ऐसे सभी विभाग जहां विभिन्न कार्यों के लिए आमजन की आवाजाही ज्यादा होती है, निगरानी कराई जा रही है। समय से दफ्तर नहीं आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ही वसूली और बिचौलियों की मौजूदगी पाए जाने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।