रंग सिंदूरी और अमर उजाला की अनूठी मुहिम के तहत आयोजित दो दिवसीय (3-4 दिसंबर) ‘कलर्स ऑफ नेचर’ फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ शुक्रवार को आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी में हुआ। उद्घाटन मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने किया। कुलपति ने प्रदर्शनी में बड़े करीने से सजाए गए, मोबाइल से खींचे गए सभी फोटो व 200 साल पुरानी संरक्षित एंटीक सामग्री बड़े ध्यान से देखी और आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। प्रदर्शनी शनिवार देर शाम तक देखी जा सकती है।
प्रदर्शनी में कानपुर के वरिष्ठ फोटोग्राफर अनिल सिंदूरी की मोबाइल से खींची गई फोटो की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। कोरोना संकट के बीच अनिल ने फोटोग्राफी का शौक पूरा किया। साथ ही 100 से ज्यादा ऐसी फोटो खींची जो प्रकृति की सुंदरता को दर्शा रही हैं। तस्वीरें जीवंत हैं। कुलपति ने कहा कि उन्हें प्रशासनिक व शिक्षण कार्य का लंबा अनुभव है, लेकिन इस तरह की प्रदर्शनी पहली बार देखी है जो ज्ञानवर्धक है। प्रदर्शित एंटीक्स से तकनीक की समृद्धता समझी जा सकती है। पहले और अब की तकनीक में बहुत अंतर है। इसे समझने की जरूरत है। यह प्रदर्शनी हमारी तकनीक की यात्रा बताने वाली है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की प्रमुख आईटी व सोशल मीडिया कंपनियों के प्रमुख भारतीय हैं। इसका मतलब है कि हर विद्यार्थी को अपनी क्षमता की पहचान करनी चाहिए। जो पसंद हो, उसी क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहिए। फोटोग्राफर अनिल सिंदूरी ने कहा कि कोरोना से लोगों को समस्याएं हुई हैं, लेकिन कुछ लोगों ने इसे अवसर में बदल लिया। कोरोना संकट के बीच खाली समय में मोबाइल से ही फोटो खींचना शुरू कर दिया। एक-दो फोटो खींचने के बाद अच्छा लगा। अब इसे प्रोफेशन बना लिया है। कैमरा नहीं है तो मोबाइल से ही फोटो खींचते हैं।
प्रदर्शनी को सफल बनाने में आरपीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन अजय शाही का विशेष योगदान रहा है। वह सुबह से ही प्रदर्शनी स्थल पर डटे रहे। शिक्षक व कर्मचारियों ने सारी व्यवस्था बनाने में मदद की। चेयरमैन का कहना है कि इस तरह की प्रदर्शनी से सीखने का अद्भुत अनुभव मिलता है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी, उनके माता-पिता व अभिभावक फोटो के साथ एंटीक सामान की प्रदर्शनी देख विजिटर बुक में अपना अच्छा अनुभव भी लिख रहे हैं।
आकर्षण का केंद्र है एंटीक्स की प्रदर्शनी
कानपुर के लांबा म्यूजियम की तरफ से पुरानी तकनीक पर आधारित एंटीक्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। केरोसिन से चलने वाले पंखे के बारे में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक व आम लोग ज्यादा जानकारी लेते मिले। दूरबीन सहित अन्य सामान भी देखे गए। म्यूजियम के प्रमुख बब्बू लांबा ने कहा कि 15 वर्ष का था, तब से एंटीक सामान जुटा रहे हैं। इसके लिए 22 लाख किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। 8000 पुराने व एंटीक सामान को एकत्रित किया है। इन सबकी कीमत बहुत है, लेकिन कुछ बेचना नहीं है। बेटी सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता है। बेटा भी अच्छी जगह काम कर रहा है, लेकिन दोनों को पुरानी वस्तुओं से प्यार है। आपने कभी ढाई रुपये का नोट देखा है, मेरे पास वह भी है।
ये है खास
- केरोसिन (मिट्टी के तेल) से चलने वाला फ्रिज। यह 144 साल पुराना है।
- जर्मनी में बना पंखा भी है, जो 140 साल पुराना है। पंखा भी केरोसिन से चलता था।
- 95 साल पुराना रूम हीटर। जर्मनी में बनी 70 साल पहले की वेट मशीन।
- 101 साल पहले बना प्रोजेक्टर।
- 175 साल पहले का फर्स्ट एड (मेडिकल) बॉक्स।
- 90 वर्ष पहले भारत में बना ताला व सरौता।
- 160 साल पुरानी दूरबीन।
- केरोसिन से चलने वाला प्रेस जो 110 साल पहले बना है।
- 111 वर्ष पहले की बनी टेंपरेचर मशीन।
- दुनिया का पहला कैलकुलेटर जो 111 वर्ष पुराना है।
- दुनिया का पहला टाइप राइटर जो 160 वर्ष पहले बना है।
- पहला कैलकुलेटर जो 1914 में बना है।
- पुराना फ्रेंच लैंप जो 1910 का बताया गया।
- 70 साल पुराना दुनिया का सीन इव का सबसे छोटा कैमरा
- 120 साल पुराना चाभी से चलने वाला प्रामोफोन।
- सबसे छोटी ब्लेड, सिलाई मशीन, नेल कटर मशीन व रेजर।