बैठक में सीएम योगी ने जनपद के इंटर कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी ली। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जिले के सभी इंटर कॉलेजों की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला अनिवार्य रूप से कराई जाए। कार्यशाला में सभी प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों व शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार कॉलेजों को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास व प्रशिक्षण से जोड़ने की जरूरत है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी की व्यवस्था तो हो ही, इन्हें डिजिटल लाइब्रेरी से भी जोड़ा जाए। विद्यालयों में पुरातन छात्रों के अनुभव का भी लाभ लिया जाए। विद्यार्थियों को खेलों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति भी जागरूक किया जाए। राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से मनाया जाए और प्रार्थना सभा से पूर्व महापुरुषों के बारे में जानकारी दी जाए। ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों में साइंस लैब अपडेट किया जाए। विद्यार्थियों को पौधरोपण का महत्व समझाते हुए अलग अलग तरह की वाटिकाएं विकसित की जाएं।
बैठक में सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, एमएलसी डॉ धर्मेंद्र सिंह, प्रशासन, पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारी, माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में आवश्यक संसाधन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रबंधकीय विद्यालयों को खाली पड़ी जमीन के 25 प्रतिशत व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति दी है। इससे अर्जित आय का उपयोग विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ही करना होगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि विद्यालयों की लंबित मान्यता पत्रावली 15 दिन में निस्तारित की जाए। जिन विद्यालयों में शिक्षक कम हैं, वहां मानदेय पर शिक्षक रखे जाएं।