गोरखनाथ मंदिर में सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। तड़के पांच बजे उन्होंने सबसे पहले बाबा गोरखनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई और उनकी पूजा-अर्चना की।
उसके बाद अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। हमेशा की तरह मंदिर परिसर का भ्रमण करने के बाद वह गोशाला में गए और आधे घंटे गायों के बीच रहे। उन्हें दुलारा-पुचकारा और अपने हाथ से गुड़-चना भी खिलाया।