लालडिग्गी के पास खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि नदियों का जलस्तर कम हो रहा है। रविवार को लोगों और राहत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि नदियों में पानी अधिक होने की वजह से शहर का पानी वहां नहीं जा सका, जिससे कुछ मोहल्लों में जलभराव की स्थित बन गई, मगर नगर निगम और प्रशासन की टीम ने अच्छा काम करते हुए जलनिकासी का प्रबंध किया। उन्होंने सभी को त्योहारों की शुभकामनाएं दी और कहा कि जल्द ही सभी को बाढ़ से निजात मिल जाएगी।
कोई छूटेगा नहीं, पर्याप्त मात्रा में हो रहा खाद्यान्न वितरण
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। कोई भी छूटने नहीं पाएगा। सभी तक मदद पहुंचाई जा रही है। हर राशन सामग्री किट में 10-10 किलो आटा-चावल और आलू के अलावा दो किलो अरहर दाल, रिफाइंड तेल, नमक, हल्दी, मिर्च, मसाले के पैकेट, लाई, चना, गुड़, मोमबत्ती, दिया सलाई आदि के साथ ही छाता और धूप व गर्मी से बचने के लिए प्लॉस्टिक भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि तीन दिन के भीतर सभी पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचा दी जाएगी।
कम्युनिटी किचन से भी कर रहे भोजन की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन घरों में बाढ़ या बारिश का पानी घुस गया है, उन परिवारों के भोजन के लिए कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की जा रही है। सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि एक भी नागरिक भूखा न रहे। पानी से घिरे लोगों को उनके दरवाजे पर ही भोजन पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है।
पशुओं की भी कर रहे फिक्र, दे रहे भूसा-चारा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के पशुओं का भी सरकार ख्याल रख रही है। प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं को भूसे-चारे का संकट न हो, इसके लिए प्रशासन को निर्देशित किया गया है। हमें मनुष्यों के साथ उनके पशुओं को भी बचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के समय सांप व अन्य जहरीले जंतुओं तथा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सिन व एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि जलभराव के चलते हैजा, डायरिया जैसी बीमारियों की आशंका को देखते हुए ऐसे क्षेत्रों में ओआरएस के पैकेट बांटने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को इन बीमारियों से होने वाले डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। साथ ही पेयजल को शुद्ध रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग को क्लोरीन टैबलेट बांटने को कहा गया है।
आपदा से मृत्यु के साथ पशु हानि पर भी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी की मृत्यु अत्यंत दुखदाई होती है। फिर भी आपदा में किसी की मृत्यु होने पर संबंधित के परिवार को चार लाख रुपये तत्काल आर्थिक सहायता देने का निर्देश प्रशासन को दिया गया है। सांप या अन्य हिंसक-जहरीले जानवर के हमले में मृत्यु पर भी यह मदद दी जाएगी। बाढ़ के चलते किसी किसान या बटाईदार की मृत्यु पर उसे तत्काल मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये की बीमा से आच्छादित करने का निर्देश प्रशासन को दिया गया है। इसी तरह यदि किसी व्यक्ति के पालतू पशु (गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी आदि) की बाढ़ के चलते मृत्यु हो जाती है तो उसके लिए भी सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता मिलेगी।
पीड़ितों को देंगे भूमि का पट्टा, मुख्यमंत्री आवास भी मिलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के चलते जिनके मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके लिए सरकार 95 हजार रुपये तक अनुमन्य धनराशि देगी। यदि किसी का मकान कटान के चलते नदी में विलीन हो गया है तो सरकार उसे न केवल आवास के लिए भूमि का पट्टा देगी, बल्कि मुख्यमंत्री आवास योजना से आवास की भी व्यवस्था की जाएगी। जब तक आवास की व्यवस्था नहीं होती तब तक ऐसे लोगों को सरकार की तरफ से संचालित शरणालयों में जगह दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सूरत में किसी को बेघर नहीं रहने देंगे।
फसल मुआवजा के लिए किया जा रहा सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों की बर्बाद फसलों की क्षतिपूर्ति का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण शुरू करा दिया गया है। ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि सभी प्रभावित किसानों को समय से मुआवजा मिल जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलभराव के चलते इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए हर क्षेत्र में 5 से 12 सितंबर तक एक सप्ताह का विशेष स्वच्छता, सैनिटाइजेशन व फॉगिंग का अभियान शुरू किया जा रहा है। इसकी निगरानी के लिए लखनऊ से अधिकारी क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी से अभियान में सहभागी बनने की अपील की।
चौरीचौरा विस क्षेत्र में 18 करोड़ रुपये से बाढ़ बचाव कार्य
चौरीचौरा तहसील के झंगहा स्थित आदित्य पब्लिक स्कूल में बाढ़ राहत सामग्री वितरण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ बचाव को लेकर सरकार ने पहले से तैयारी कर रखी थी। पर यह आपदा है और आपदा में कितने भी संसाधन या उपाय हों, कम पड़ जाते हैं। बाढ़ से बचाव के लिए अकेले चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में 18 करोड़ रुपये की योजनाएं दी गईं जो पूर्ण या पूर्णता की ओर हैं।
मोटर बोट पर बैठ दो बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे सीएम, साझा किया दर्द
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को पाली ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र मैला व भुआ शहीद गांव में मोटर बोट से जाकर गांव का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि किसी को भी दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बचाव राहत कार्यों के बारे में फीडबैक भी लिया। अफसरों को निर्देश दिए कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी परिवार को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गांव में एक बड़ी पुलिया बनाने के साथ गांव की सड़क ऊंची करने का निर्देश दिया। इस दौरान आवास विकास परिषद के उपाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी, विधायक शीतल पांडेय, जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष राम जियावन मौर्य, प्रभाकर दूबे, ब्लॉक प्रमुख शशि प्रताप सिंह, दिलीप यादव, रामप्रकाश शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य संजय शुक्ला, गोपाल गुप्ता सहित कई भाजपा नेता व अधिकारी मौजूद रहे।
बच्चों को मुख्यमंत्री की गोद में देख गदगद परिजन भूले बाढ़ का दर्द
मोटर बोट से बाढ़ प्रभावित मैला व भुआ शहीद गांव का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीणों का हाल जानने और उन्हें हर मदद मुहैया कराने का आश्वासन देने के साथ ही बच्चों को गोद में लेकर दुलारा। एक-एक परिवार से मिलते हुए जैसे ही मुख्यमंत्री आगे बढ़े उनकी नजर एक घर के बरामदे में खेल रहे मासूम हर्षित पर पड़ी। उन्होंने उसे गोद में उठा लिया। नजर से नजर मिलाकर उसे पुचकारा और पूछा कैसे हो। करीब ढाई साल का हर्षित उनकी बातों को तो शायद नहीं समझ सका पर अपनेपन का एहसास महसूस कर मुस्कुरा दिया। हर्षित अपनी मां के साथ अपने ननिहाल भुआ शहीद आया है। उसे मुख्यमंत्री की गोद में देखकर उसके मामा राजू गुप्ता समेत पूरा परिवार खुशी से इतना गदगद हो उठा कि बाढ़ से उपजी परेशानी छोटी पड़ गई। मुख्यमंत्री थोड़ा और आगे बढ़े तो दीपू की बिटिया दीपशिखा को गोद में लेकर पुचकारने लगे। इस लम्हे को यादगार बनाने के लिए बिटिया के परिजन ही नहीं गांव के कई अन्य लोग भी मोबाइल से तस्वीरें खींचने लगे।