मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं। गोरखपुर की जिन विकास परियोजनाओं का पहले शिलान्यास हुआ था, अब उनका लोकार्पण होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी ने रविवार को गोरखनाथ मंदिर में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में गोरखपुर में नए खाद कारखाने का शिलान्यास किया था। यह समय सीमा के साथ बनकर तैयार है। हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के कारखाने को प्रधानमंत्री सात दिसंबर को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे किसानों को समय से खाद की आपूर्ति होगी। रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश को बीमारियों से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने 2016 में एम्स का शिलान्यास किया था। यह एम्स बनकर तैयार है। लोकार्पण के साथ ही लोगों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। एम्स का निर्माण रिकार्ड समय में पूरा किया गया। ओपीडी चल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1977 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस के वायरस को पहचाना गया था। बीमारी न जाने कब से रही होगी। वायरस की पहचान भी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एन आईवी) पुणे में की गई थी। लंबे समय तक यहां पर वायरस की पहचान की पुख्ता व्यवस्था नहीं थी। सैंपल पुणे भेजे जाते थे, लेकिन अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) का क्षेत्रीय मेडिकल अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बन गया है। प्रयोगशालाएं आधुनिक सुविधा-संसाधनों से लैस हैं। अब इंसेफेलाइटिस, कालाजार, चिकनगुनिया, डेंगू के साथ कोरोना वायरस की जांच की जा सकेगी। रिसर्च भी होगा। इसका शिलान्यास 2018 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने किया था। अब प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे।
पीएम मोदी ने जनहित में दीं विकास परियोजनाएं : सीएम
गोरखनाथ मंदिर में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने व्यापक जनहित के साथ किसानों, महिलाओं, नौजवानों, बच्चों की खुशहाली व क्षेत्र की उन्नति के लिए विकास परियोजनाएं दी हैं। विपक्ष इसे अब तक वोट बैंक ही समझता था। उन्होंने कहा कि 1990 में फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) का खाद कारखाना बंद हो गया था। कई सरकारें आईं। आश्वासन दिए गए, लेकिन 26 वर्षों तक कुछ नहीं हुआ। इससे अन्नदाता प्रभावित हो गए। सामान्य नागरिकों के जीवन और विकास पर विपरीत असर पड़ा। रोजगार की संभावनाओं पर विराम लग गया। खाद कारखाना दोबारा चलेगा, यह सपना ही लगता था, लेकिन यह सपना साकार हो चुका है।