अतरौली के रहने वाले विजय यादव कोई बड़ा व्यवसाय करना चाहते थे। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने 66 हजार रुपये जुटाए। एक एजेंट के झांसे में आकर रुपये जमा करा दिए। तीन साल बाद मालूम हुआ कि जिस कंपनी में उन्होंने रुपये जमा कराए, वह तो भाग गई। कई दिनों तक वह परेशान रहे। कुछ परिचितों ने निराश न होने का हौसला दिया तो कुछ ने उनका मजाक बनाया। इससे परेशान होकर वह कई दिनों तक घर से बाहर निकलने से बचते रहे।
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गोरखपुर जिले में एक दर्जन से अधिक चिट फंड कंपनियां खोलकर संचालकों और कर्मचारियों ने लोगों को कम समय में अधिक लाभ देने का झांसा दिया। इस चक्कर में पड़कर लोगों ने मेहनत से कमाई पूंजी जमा कराई। किसी ने बेटी की शादी, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई तो किसी ने आगे चलकर मकान बनवाने का सपना संजोया, लेकिन रुपये जमा कराने के बाद भुगतान का समय आया तो कंपनियां बोरिया-बिस्तर समेटकर लापता हो गईं।
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इसके बाद लोग बांड, रसीद और अन्य कागजात लेकर दर-दर भटकते रहे। लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी। शासन से निर्देश के बाद जब प्रक्रिया शुरू हुई है तो तहसीलों में लाइन लग गई है। बुधवार को सदर तहसील सहित अन्य जगहों पर कुल 1659 आवेदन जमा हो चुके थे।
कर्मचारियों के अनुसार, इन आवेदनों में पांच हजार से लेकर दो-दो लाख तक का जिक्र है। अधिकांश ग्राहकों ने 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक जमा कराए हैं। एक अनुमान के अनुसार, करीब दो करोड़ रुपये की वापसी के लिए आवेदन हो चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि अभी कोई अंतिम तिथि समय सीमा तय नहीं है। इसलिए आवेदन पत्र लिए जाएंगे।
| तहसील |
आवेदन |
| बांसगांव |
25 |
| चौरीचौरा |
300 |
| गोला |
47 |
| सहजनवां |
117 |
| कैंपियरगंज |
225 |
| बांसगांव |
25 |
| खजनी |
10 |
| सदर |
880 |
पियरलेस, पवन, स्काईलैंड, कल्पतरू, जीसीए, लीला लीजिंग एंड हाउसिंग फाइनेंस, यक्ष फाइनेंस सहित एक दर्जन से अधिक कंपनियों में लोगों ने रकम जमा कराई है। इनमें उन्हीं कंपनियों के लिए ज्यादातर आवेदन आ रहे हैं, जो वर्ष 2013 के बाद खुली थीं। तहसील कर्मचारियों का कहना है कि अभी तक 2013 के बाद ही आवेदन पत्र आए हैं।
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एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विनीत सिंह ने कहा कि सभी तहसीलों में आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके अनुसार ही डाटा तैयार किया जाएगा। तभी यह तय हो सकेगा कि लगभग कितनी रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं। शासन के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है।