अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने कहा कि संरक्षक व चेयरमैन को नोटिस जारी करके जवाब मांगने का कोई अधिकार नहीं होता है। अध्यक्ष ही सर्वेसर्वा होता है। संगठन के किसी संविधान में नहीं लिखा है कि दूसरे संगठन में अध्यक्ष नहीं बन सकते हैं। अध्यक्ष की सहमति के बिना आमसभा नहीं बुलाई जा सकती है। गबन के आरोपों में घिरे महामंत्री को निष्कासित कर दिया गया है। अब वह संगठन के किसी पद पर नहीं रहेंगे।
महामंत्री सुरेश गुप्ता ने कहा कि विशेष आमसभा मंगलवार को ही हुई। एक संगठन में रहते हुए दिवाकर सिंह ने दूसरे संगठन के अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लिया। आमसभा में इसपर चर्चा हुई तो दिवाकर सिंह ने इनकार भी नहीं किया। आमसभा ने ही अध्यक्ष को संगठन से निष्कासित करने का फैसला लिया है। लखनऊ के गिरिराज रस्तोगी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। घर बैठकर कोई पत्र जारी करे और कहे कि महामंत्री को हटा दिया है। यह गैरकानूनी व असंवैधानिक है। निष्कासन का अधिकार सिर्फ आमसभा को प्राप्त है। अध्यक्ष का निष्कासन भी आमसभा के द्वारा किया गया है।