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डीडीयू में छात्रा की मौत का मामला: प्रियंका के पिता ने की सीबीआई जांच की मांग, बोले- हत्या को आत्महत्या साबित करना चाहती है पुलिस

Wed, 25 Aug 2021 11:58 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

पिता ने डीएम को पत्र देकर की मांग, सीएम से नहीं मिलने देने का लगाया आरोप। पिता बोले, पुलिस साबित करना चाहती है आत्महत्या, जबकि उसकी की गई है हत्या।
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मृत छात्रा प्रियंका की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में 31 जुलाई दुपट्टे के फंदे से लटकी मिली प्रियंका की मौत की सीबीआई जांच की मांग की गई है। इस सिलसिले में छात्रा के पिता ने डीएम को पत्र भी दिया है। पिता का आरोप है कि घटना के 24 दिन बाद भी पुलिस पर्दाफाश नहीं कर पाई है। पुलिस इसे आत्महत्या साबित करना चाहती है जबकि उसकी हत्या की गई है।
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पिता विनोद कुमार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अभी तक दर्ज किए गए केस में कुछ नहीं किया गया है। जिसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया, उससे पूछताछ तक नहीं हुई। गिरफ्तारी का प्रयास तक नहीं किया गया। विनोद का आरोप है कि घटना को लेकर वह सीएम से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें नहीं मिलने दिया गया।

उनका कहना है कि जब उन्हें मौत के बाद घटना स्थल पर बुलाया गया तो जिस टुपट्टे से बेटी की लाश लटकी थी, उसमें सरकने वाला फंदा नहीं लगा था, बल्कि उसमें बाकायदा गांठ बांधा गया था। ऐसे में उससे फांसी लगाना किसी भी हाल में संभव नहीं होगा। गर्दन पर खून लगा हुआ था। शरीर पर चोट के भी निशान थे। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी दर्ज नहीं है। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही बदलवा दी है। उनका कहना है कि पैर भी जमीन छू रहा था, उसके पास में उसका चप्पल भी रखा हुआ था। ऐसे कई साक्ष्य हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है। उन्होंने विभागाध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि सीबीआई जांच से ही सही तथ्य सामने आएंगे।
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यह है मामला
31 जुलाई को शाहपुर इलाके के शिवपुर सहबाजगंज निवासी प्रियंका कुमारी की गृह विज्ञान विभाग में स्टोर रूम में फंदे से लटकी मिली थी। प्रियंका के पिता ने विभागाध्यक्ष और उनके अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया है।
 
पुलिस के हाथ अब तक खाली
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने घटना को खुदकुशी करार दिया था लेकिन परिजनों के हत्या के आरोप लगाने के बाद घटना की जांच के लिए लखनऊ से एफएसएल की टीम को बुलाया गया था। टीम ने दीक्षा भवन स्थित छात्रा के परीक्षा कक्ष से मौत स्थल तक का निरीक्षण किया। प्रियंका के शव के वजन के बराबर की डमी के सहारे घटना को री-क्रिएट किया। यह जानने का प्रयास किया गया कि ट्यूब लाइट का हुक डमी का वजन उठाने में सक्षम है या नहीं। मामले की विवेचना कर रहे सीओ चौरीचौरा का कहना है कि एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ किया जाएगा। मोबाइल फोन के छानबीन से कोई खास सुराग नहीं मिल सका है। छात्रा की सहेलियों ने भी कोई खास तथ्य नहीं बताया है।
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