93 प्रतिशत लोगों में बन चुकी है एंटीबॉडी
एम्स गोरखपुर में कोरोना की तीनों लहरों में अलग-अलग सीरो सर्वे कराए गए। कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के नेतृत्व में डॉ. प्रदीप और डॉ. रमाशंकर ने सर्वे कार्य पूरा किया। सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी लहर के बाद पूर्वांचल के 93 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बन चुकी है। इससे पहले दूसरी लहर में 90.5 प्रतिशत और पहली लहर में 73.9 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बनी थी। लगातार छह महीने तक एंटीबॉडी उच्च स्तर पर बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबॉडी बने रहने पर संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।
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आरएमआरसी वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि कोरोना का जो नया वेरिएंट जेएन.1 आया है, वह यूरोपीय देशाें में पांच महीने पहले मिला था। वहां से केरल होते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रहा है। अभी जो केस सामने आए है, उसमें वायरस के चलते बहुत अधिक दिक्कतें नहीं आई हैं। केरल में जो मौते हुई हैं, उनमें अभी इसकी जांच होनी बाकी है कि केवल कोरोना के चलते ही मौत हुई, या वे लोग पहले से ही किसी अन्य बीमारी से ग्रसित थे। ऐसा देखा गया है कि जिन लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लग चुका है, उनमें नए वैरिएंट का भी प्रभाव अधिक नहीं है।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि अभी कोई नया संक्रमित केस नहीं मिला है। कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। अधिकांश लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लग चुका है। संभावित मरीजों की जांच व इलाज की पूरी व्यवस्था है। जिला अस्पताल से लेकर उच्च संस्थानों तक में इसकी पूरी व्यवस्था है। अगर किसी को दिक्क्त आएगी तो सरकारी अस्पताल में उसे हर तरह की सुविधा दी जाएगी।