मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद डेढ़ घंटे तक ऑपरेशन कर सिस्ट को अलग किया। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. अंजार अहमद, डॉ. राजश्री पांडेय, डॉ. दीप्ति और एनेस्थीसिया के डॉ. मेहताब आलम का विशेष सहयोग रहा।
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि 27 साल हो गए इस पेशे में। लेकिन इतना बड़ा सिस्ट वह भी मासूम के आंखों में नहीं देखा। यह बीमारी लाखों मासूमों में किसी एक को होती है। खास बात यह है कि यह जन्मजात होती है। लेकिन मासूम के परिजनों के मुताबिक उसे तीन माह बाद शुरू हुआ। यह भी चिंता वाली बात है।
क्या हैं कंजंक्टिवा
डॉ. राम कुमार ने बताया कि कंजंक्टिवा को सिस्ट भी कहा जाता है। सिस्ट एक मांस का टुकड़ा होता है, जो आंखों के ट्रांसपेरेंट मुकौस मेम्ब्रेन (पारदर्शी श्लेष्म झिल्ली) के सफेद हिस्से को धीरे-धीरे ढक लेता है। इसकी वजह से आंखों से दिखाई देना बंद हो जाता है। एक समय ऐसा आता है कि रोशनी चली जाती है। नवजात शिशुओं में टियर डक्ट के (अश्रु नलिका) बंद होने के कारण यह समस्या आती है।