जांच में सामने आया है कि ब्लड बैंक के रजिस्टर में खून देने वाले गोरख का नाम ही दर्ज नहीं है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि ऐसा कैसे हुआ और इसमें किसकी मिलीभगत है। अभी तक की जांच में पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली है कि मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी भी इस नेटवर्क में शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, सरगना वसील पहले नगर निगम का सफाई कर्मी था। वर्तमान में वह खून की दलाली कर रहा है। खजांची चौराहे से मजदूरों को 5 से 6 हजार प्रति यूनिट खून डोनेट करने पर तय कर ब्लड बैंक ले जाते हैं। वहां खून निकलवाकर जरूरतमंद को 10 हजार प्रति यूनिट बेचते हैं और 1500 से 2500 प्रति यूनिट मुनाफा कमाते हैं। एजेंट केशर देव भी मजदूर है। ये लोग हर हफ्ते 2 से 3 लोगों से खून निकलवाकर बेचते थे।
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पुलिस ने रविवार की शाम को वसील खान खजांची चौराहे से महराजगंज के पनियरा निवासी मजदूर गोरख चौहान को 6 हजार में एक यूनिट खून देने की बात कहकर ले गया। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में केशर देव मिला। उसने उसका खून निकलवाया। खून, पिपराइच के रुदलापुर के मरीज मोहन को 10 हजार में बेच दिया। बाद में खून देने वाले गोरख को सिर्फ 1100 रुपये देकर मारपीट कर भगा दिया था।
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इसके बाद गोरख की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर वसील और केशव को गिरफ्तार कर लिया था। उसने यह भी बताया था कि खून निकलने के बाद उसे चक्कर आ गया था। इससे वह गिर भी गया था। यह बात दर्ज एफआईआर में भी लिखी गई है।
अब पुलिस विभाग ने एक इमरजेंसी एप लांच किया है। एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया कि जिसे भी खून की जरूरत हो, वह इस एप पर ब्लड जरूरत की सूचना देगा तो रक्तदान करने वाले सिपाही तत्काल निशुल्क रक्त उपलब्ध कराएंगे। साथ ही लोग सिपाही राजन को 8924091231 पर काॅल कर सकते हैं। यह रक्तदान निशुल्क करेंगे।
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एएसपी मानुष पारिक ने कहा कि पुलिस सीडीआर खंगाल रही है। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के रजिस्टर में केस दर्ज कराने वाले पीड़ित का नाम दर्ज नहीं था। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। आगे अन्य जो भी दोषी मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी।