लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम अपनी दुकानें हटाने के लिए आवंटन निरस्त कर चुका है। संबंधित दुकानदारों को नोटिस भी दिया है, लेकिन रेलवे कह रहा है कि वह अपनी दुकानें तभी हटाएगा जब उसे उचित मुआवजा मिलेगा।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जमीन की समस्या सुलझाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। तहसील के लोगों से कहा गया कि रेलवे से मिलकर निस्तारण करें। तहसील के लोग जमीन को लोक निर्माण विभाग की बता रहे हैं, जबकि रेलवे अपनी जमीन होने का प्रमाण दे रहा है। इस मसले पर कोई फैसला नहीं हो पाने के कारण चौराहे के चौड़ीकरण का काम लटक गया है।
गोरखपुर परिक्षेत्र के उप मुख्य अभियंता रविंद्र मेहरा ने कहा कि रेलवे की जो दुकानें हैं, उनका दस्तावेज रेलवे के पास है। प्रशासन को दस्तावेज दिखाया जा चुका है। इसके बाद अभी तक कोई वार्ता नहीं हुई है।