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Gorakhpur News: डीडीयू में पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान की होगी पढ़ाई

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान की भी पढ़ाई होगी। सत्र 2026-27 से ही यह पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है। इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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डीडीयू में पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान पाठ्यक्रम का संचालन प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से किया जाएगा। इसके संचालन को लेकर प्राचीन इतिहास विभाग के वरिष्ठतम प्रोफेसर राजवंत राव और विभागाध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत इस कोर्स के संचालन को लेकर संभावनाएं तलाशने के साथ ही जरूरी कंटेंट भी तैयार किए जा रहे हैं।
पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान का कोर्स एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा या दो वर्षीय परास्नातक के रूप में संचालित हो, इसे लेकर मंथन किया जा रहा है। यह कोर्स सेल्फ फाइनेंस मोड में ही संचालित किया जाएगा। एक-दो दिन में कोर्स की अवधि और प्रारूप को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाने की संभावना है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान दो अलग-अलग विधाएं हैं लेकिन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए दोनों को मिलाकर एक ही कोर्स के संचालन की दिशा में लगभग सहमति बन गई है।
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प्रधानमंत्री ने दिया था नए कोर्स का सुझाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2025 में पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान, फॉरेंसिक विज्ञान के कोर्स शुरू किए जाने को लेकर सुझाव दिया था। इसे लेकर जनवरी में राज्य सरकार की ओर से सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी किया गया था। इस क्रम में फॉरेंसिक विज्ञान की पढ़ाई को लेकर तैयारियां पहले ही लगभग पूरी की जा चुकी हैं।

पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान में अपार संभावनाएं
प्रो. राजवंत राव ने बताया कि पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान में अपार संभावनाएं हैं, जबकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की बहुत कमी है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई), मॉडल आर्कियोलॉजी, संग्रहालय, सर्वे, मैपिंग आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। हर जिले में एक पुरातत्व अधिकारी के साथ ही कई अन्य विशेषज्ञ भी होते हैं।



पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान में अपार संभावनाएं हैं, जबकि विशेषज्ञों की भारी कमी है। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में रोजगारपरक पाठ्यक्रम के रूप में सत्र 2026-27 से इसके संचालन की योजना है। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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