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Gorakhpur News: अमरूद के लिए जाना जाता था बाग, आज स्मैक-कच्ची ने कर दिया बदनाम

Mon, 08 Jan 2024 12:42 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अमरूतानी शहर के करीब का हिस्सा है, लेकिन आज भी यहां पर मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क की पर्याप्त व्यवस्था न होने की वजह से यहां पर चाहकर भी कोई बस नहीं पाता।
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अमरूतानी में नहीं बना है रोड। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अमरूतानी की पहचान वक्त के साथ बदली है। पहले यहां पर शहर के शौकीन लोग अमरूद के लिए जाते थे। पुराने लोग बताते हैं, यहां पर पहले बच्चे भी खेलने के लिए आते थे, लेकिन वर्ष 1980 के बाद धीरे-धीरे यह इलाका पहले कच्ची शराब और फिर स्मैक के लिए बदनाम हो गया। शहर के करीब के इस हिस्से में शौकीन लोगों ने जमीन भी खरीदी, लेकिन मूलभूत सुविधाएं न होने की वजह से विकास नहीं हो सका।

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जिन लोगों ने जमीन ली है, वह भी कभी कभार ही आते हैं। वक्त के साथ ही इस इलाके का नाम आते ही लोगों के जेहन में अपराध ही आता है। अब इस तस्वीर को सिर्फ विकास के दम पर ही बदला जा सकता है। यहां के लोग भी चाहते है कि उनके इलाके की पहचान बदले।

शहर को करीब से जानने वाले साहित्यकार रविंद्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई बताते हैं- मुझे अच्छे से याद है, यह घना जंगल था। इतने पेड़ थे कि दिन में भी अंधेरा रहता था। अमरूद यहां का प्रसिद्ध था, लेकिन बाद में यह इलाका कच्ची शराब और स्मैक के लिए पहचाना जाने लगा। इसी वजह से यहां पर कोई रहना, बसना भी नहीं चाहता है।
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अमरूतानी में रहने वाले ही दीपचंद, राजन साहनी बताते हैं -एक हिस्सा जब पेड़ से साफ हुआ तो वहां पर लोगों ने घर बनवाया, रहना भी शुरू किया, लेकिन कच्ची शराब के धंधे ने इस इलाके को बदनाम कर दिया। अंदर के घने क्षेत्र में कच्ची शराब बनती है और पुलिस आकर अक्सर पकड़ भी लेती थी। इस वजह से इलाका बदनाम होता चला गया। इस वजह से यहां पर कोई रहना ही नहीं चाहता है। वह बताते हैं- अमरूतानी से कुछ दूरी पर बसे नौसड़ और उसके आगे तक की जमीनों की कीमत बढ़ गई, लेकिन बदनामी की वजह से यहां पर जमीनों की कीमत भी नहीं बढ़ पाई।

आज भी सुविधाएं नहीं, चाहकर भी बसना आसान नहीं
अमरूतानी शहर के करीब का हिस्सा है, लेकिन आज भी यहां पर मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क की पर्याप्त व्यवस्था न होने की वजह से यहां पर चाहकर भी कोई बस नहीं पाता। राज साहनी बताते हैं, यहां पर सिर्फ वही पुराने लोग हैं, जिनका गांव आसपास है और यहां पर उनकी जमीन थी, इस वजह से निर्माण करवा लिए। दूसरे कई मकान ऐसे हैं, जो कच्ची शराब के धंधे से जुड़ा होने की वजह से ही यहां पर आए और मकान बनवाकर अवैध काम करके इसको और बदनाम कर दिए।

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पहले इतनी गंदगी नहीं थी, जितना अब बदनाम हुआ
पहले बांध छोटा होने की वजह से बाढ़ का पानी इस इलाके में आ जाता था, लेकिन फिर भी पेड़ की हरियाली की वजह से आसपास के गांव के लोग गर्मी के मौसम में ठंड का एहसास करने के लिए यहां पर आते थे। पहले इतनी गंदगी नहीं थी, जितना बाद में कच्ची शराब और स्मैक की वजह से हो गया। अब तो सही मानिए वहां पर अगर बच्चा अमरूद खाने भी जाए तो डर ही लगता है।-गिरधारी लाल, रिटायर्ड फौजी।

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अमरूतानी से आने वाले को देखते है संदेह की नजर से
यह इलाका इस कदर शराब और स्मैक के लिए बदनाम हो गया है कि आज वहां से कोई दिन में ही आते नजर आ जाए तो फिर घरवाले परेशान हो जाते हैं कि कहीं उसे कोई गलत लत तो नहीं लग गई। यानी वहां पर जाने के बाद उसे घरवालों को सफाई जरूर देनी पड़ती है। अगर वास्तव में यहां पर सरकारी योजना ला दी जाए तो इस क्षेत्र का विकास हो जाएगा और बदनामी का दाग भी हट जाएगा।- रूपेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संघ परिषद।

 
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