अमरूतानी में रहने वाले ही दीपचंद, राजन साहनी बताते हैं -एक हिस्सा जब पेड़ से साफ हुआ तो वहां पर लोगों ने घर बनवाया, रहना भी शुरू किया, लेकिन कच्ची शराब के धंधे ने इस इलाके को बदनाम कर दिया। अंदर के घने क्षेत्र में कच्ची शराब बनती है और पुलिस आकर अक्सर पकड़ भी लेती थी। इस वजह से इलाका बदनाम होता चला गया। इस वजह से यहां पर कोई रहना ही नहीं चाहता है। वह बताते हैं- अमरूतानी से कुछ दूरी पर बसे नौसड़ और उसके आगे तक की जमीनों की कीमत बढ़ गई, लेकिन बदनामी की वजह से यहां पर जमीनों की कीमत भी नहीं बढ़ पाई।
आज भी सुविधाएं नहीं, चाहकर भी बसना आसान नहीं
अमरूतानी शहर के करीब का हिस्सा है, लेकिन आज भी यहां पर मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क की पर्याप्त व्यवस्था न होने की वजह से यहां पर चाहकर भी कोई बस नहीं पाता। राज साहनी बताते हैं, यहां पर सिर्फ वही पुराने लोग हैं, जिनका गांव आसपास है और यहां पर उनकी जमीन थी, इस वजह से निर्माण करवा लिए। दूसरे कई मकान ऐसे हैं, जो कच्ची शराब के धंधे से जुड़ा होने की वजह से ही यहां पर आए और मकान बनवाकर अवैध काम करके इसको और बदनाम कर दिए।
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पहले इतनी गंदगी नहीं थी, जितना अब बदनाम हुआ
पहले बांध छोटा होने की वजह से बाढ़ का पानी इस इलाके में आ जाता था, लेकिन फिर भी पेड़ की हरियाली की वजह से आसपास के गांव के लोग गर्मी के मौसम में ठंड का एहसास करने के लिए यहां पर आते थे। पहले इतनी गंदगी नहीं थी, जितना बाद में कच्ची शराब और स्मैक की वजह से हो गया। अब तो सही मानिए वहां पर अगर बच्चा अमरूद खाने भी जाए तो डर ही लगता है।
-गिरधारी लाल, रिटायर्ड फौजी।
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